झांसी। किसानों की आय में इजाफा करने की खातिर सरकार अब सामूहिक खेती अपनाने पर खास जोर दे रही है। इस मॉडल के तहत किसानों को एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा। इनके जरिए व्यापक पैमाने पर फसल उत्पादन के साथ उसे प्रोसेस करके सीधे बाजार में बेचा जा सकेगा। सरकार तकनीक मुहैया कराने के साथ कृषि उपकरणों के जरिए मदद करेगी। कॉरपोरेट कंपनी की तर्ज पर समूह में डॉयरेक्टर एवं सीईओ भी बनेंगे, जो समूह के ही सदस्य किसान होंगे। कंपनी को होने वाली आय को आयकर से भी छूट दी जाएगी।
सरकार ने इनको किसान कृषि उत्पादक समूह (एफपीओ) का नाम दिया है। झांसी में अब तक आठ एफपीओ पंजीकृत भी हो चुके। कृषि अफसरों के मुताबिक समूह में खेती करने से न सिर्फ लागत कम होगी बल्कि उत्पादन बढ़ने के साथ मुनाफे में इजाफा होगा। बुंदेलखंड की उर्द, मूंग, मूंगफली, तिल, चना आदि की काफी लोकप्रियता है। दलिया बनाने में इस्तेमाल होने वाले कठिया गेहूं की भी जबर्दस्त मार्केट है लेकिन, किसान इसका फायदा नहीं उठा पाते। अफसरों का कहना है समूह में उत्पादन के साथ इसे प्रोसेस किया जाए तब बुंदेलखंड में भी किसानों की दशा बदल सकती है। सामूहिक ख्ेाती को आगे बढ़ाने के लिए ही एफपीओ गठित किए जा रहे हैं।
न्यूनतम बारह सदस्यों के साथ इनकी शुरूआत की जा सकती है। प्रत्येक एफपीओ को कंपनी सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकरण कराना होगा। पंजीकृत एफपीओ फसल उत्पादन के अलावा विपणन समेत अन्य कार्य कर सकेंगे। उनकी कंपनी ई-मंडी से भी आसानी से जुड़ेगी। एफपीओ को खाद, बीज आदि के लाइसेंस में भी प्राथमिकता दी जाएगी। कंपनी सोसाइटी एक्ट में पंजीकरण होने की वजह से एफपीओ का पूरा काम कंपनी की तर्ज पर ही चलेगा। कंपनी में किसान ही एमडी का जिम्मा संभालेंगे। इसको होने वाली आयकर से भी पूरी तरह मुक्त रखा गया है। कृषि अधिकारियों के मुताबिक शुरूआत में एफपीओ बनाने वालों को 15 लाख तक की सहायता भी दी जाएगी।
गुरसराय, नोटा में शुरू हुई सामूहिक खेती
कृषि उत्पादन समूहों का यहां भी गठन शुरू हो गया है हालांकि अभी गिने-चुने समूहों ने ही काम शुरू किया है। सफल किसान नामक एफपीओ ने गुरसराय ब्लॉक के इटौरा एवं बंगरा ब्लॉक के नोटा गांव में सामूहिक खेती कराई जा रही है। एफपीओ निदेशक अमित पांडेय के मुताबिक इटौरा में कठिया गेहूं का उत्पादन हुआ था। इससे किसानों को काफी लाभ हुआ। अब नोटा में मूंगफली एवं दलहन की सामूहिक खेती कराई जा रही है। इससे भी किसानों की फायदा होने की उम्मीद है।
अभी कम संख्या में लोग सामने आ रहे हैं। एफपीओ को सरकार भी मदद कर रही है। इससे किसानों को मदद मिल सकेगी। - कमल कटियार उपनिदेशक, कृषि