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पैसे खत्म, कैसे लौटें काम पर, ट्रेन है नहीं बसें खचाखच

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रेलवे स्टेशन के यात्री प्रतीक्षालय में जमा भीड़, सोशल डिस्टेंसिंग तार-तार - फोटो : REPORTERS
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झांसी। बुंदेलखंड के बांदा, महोबा क्षेत्र में रहने वाले तमाम मजदूर और कामगार धीरे- धीरे ट्रेन से दूसरे शहरों के लिए काम पर वापस लौटने लगे हैं। इन मुसाफिरों को बांदा रूट पर कोई ट्रेन न चलने के कारण बस से झांसी तक आना पड़ रहा है। बस का सफर उनके लिए कष्टदायी बना हुआ है। क्योंकि बसों में सामाजिक दूरी का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। कई यात्री झांसी तक आते- आते बीमार भी हो चुके हैं।
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महोबा के नयाखेड़ा गांव में रहने वाले रामकिशोर अहमदाबाद में राजमिस्त्री का काम करते हैं। कोरोना महामारी में वे अप्रैल में बच्चों के साथ अहमदाबाद से वापस घर लौट आए थे। तीन महीने में बचत के रुपये खत्म हो गए। अब वे वापस अहमदाबाद जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे पहले पैसेंजर ट्रेन से झांसी आ जाते थे और यहां से साबरमती एक्सप्रेस से अहमदाबाद चले जाते थे। लेकिन बांदा रूट पर ट्रेनों के न चलने से वे इस बार बेहद परेशान हो गए। बस में क्षमता से अधिक यात्री बैठे थे। कोरोना से बचने के लिए घर लौटकर आए थे और बस में ऐसा लग रहा था कि कोरोना को साथ लेकर जा रहे हैं। रेलवे को कम से कम एक पैसेंजर ट्रेन का संचालन तो शुरू ही कर देना चाहिए।
दरअसल, रेलवे ने कोरोना महामारी के चलते 23 मार्च से सभी नियमित ट्रेेनों का संचालन बंद कर रखा है, जो स्पेशल ट्रेनें चलाईं जा रहीं हैं, उनमें एक भी झांसी- बांदा ट्रैक पर नहीं चल रही है। जबकि इस रूट पर पड़ने वाले महोबा, बांदा, चित्रकूट, हरपालपुर, बेलाताल समेत विभिन्न गांवों के लोग हजारों की संख्या में मुंबई, अहमदाबाद, सूरत आदि शहरों में मजदूरी व अन्य काम करते हैं।
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