झांसी। बुंदेलखंड में चित्रकूट में सबसे ज्यादा और बांदा में सबसे कम वन क्षेत्र है। वहीं, मानक के हिसाब से देखें तो झांसी समेत पांच जिलों में 15 फीसदी भी जंगल नहीं हैं। पिछले दो सालों में सिर्फ चित्रकूट में ही जंगल में इजाफा हुआ है, जबकि बाकी जिलों की स्थिति जस की तस है।
रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के फॉरेस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ. मनमोहन डोबरियाल ने बताया कि 1988 की केंद्र सरकार की वन नीति के अनुसार भूमि का 33 फीसदी वन क्षेत्र होना चाहिए, ताकि पृथ्वी चक्र अच्छे से चल सके। मगर झांसी समेत बुंदेलखंड में वन क्षेत्र लगातार घटता जा रहा है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया 2021 (एफएसआई) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में बुंदेलखंड में चित्रकूट में 19.64 और ललितपुर में 11.54 फीसदी जंगल होने से कुछ स्थिति ठीक है। वरना झांसी समेत चार जिलों में पांच से छह प्रतिशत के आसपास ही वन क्षेत्र है। सबसे खराब हालात बांदा में हैं, वहां सिर्फ 2.31 फीसदी वन क्षेत्र है। एफएसआई की 2019 और 2021 की रिपोर्ट देखें तो इन दो सालों में चित्रकूट में 45.29 वर्ग किलोमीटर जंगल बढ़ा है। बुंदेलखंड के बाकी जनपदों में हालात पहले जैसे ही हैं।
ये समस्याएं हो जातीं
डॉ. मनमोहन के मुताबिक बुंदेलखंड में कार्बन डाईऑक्साइड को शोषित करने के लिए वन क्षेत्र कम है। इस कारण वातावरण शुद्ध नहीं रह पाएगा। इससे सूखा पड़ने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे खेती पर भी असर पड़ेगा। जलवायु परिवर्तन का भी ज्यादा असर होगा। इससे फसल चक्र पर प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा वन्य जीव, जंतु और पक्षियों पर भी असर होगा। जंगल कम होने से धरती के पानी सोखने की क्षमता कम हो जाती है, इससे भूजल स्तर घटता है।
बुंदेलखंड में कहां-कितना जंगल
जिला वन क्षेत्र
बांदा 2.31 फीसदी
महोबा 5.14 फीसदी
जालौन 5.42 फीसदी
हमीरपुर 5.65 फीसदी
झांसी 6.05 फीसदी
ललितपुर 11.54 फीसदी
चित्रकूट 19.64 फीसदी
(नोट: ये आंकड़े एफएसआई 2021 की रिपोर्ट के हैं।)