संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। बुंदेली साहित्य ने समाज में मर्यादाएं स्थापित की हैं। इन परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए जब इसे नई पीढ़ी हाथ में लेती है तो हम कभी परास्त हो ही नहीं सकते। इस समारोह के आयोजन के लिए इस तिथि से उचित कोई और दिन नहीं हो सकता था। उत्तर प्रदेश की विधानसभा में क्षेत्रीय भाषाओं में बुंदेली को भी स्थान दिया गया। यह बात मुख्य अतिथि मंडलायुक्त बिमल कुमार दुबे ने शहीद जनरल बिपिन रावत पार्क में बुंदेलखंड साहित्य महोत्सव (बीएलएफ) का आगाज करते हुए कही। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व डीआईजी पश्चिम बंगाल मृत्युंजय कुमार सिंह शामिल रहे।
पहला सत्र पथ प्रदर्शक श्रीराम रहा। इसमें वरिष्ठ पत्रकार राम मोहन शर्मा से उमेश तिवारी ने बातचीत करते हुए बताया कि राम के जीवन में सबसे बड़ी मर्यादा और राजधर्म है, इसलिए वह हमारे पथ प्रदर्शक हैं। राम का जीवन कठिन रास्तों को चुनना सिखाता है और यदि राम के चरित्र का विश्लेषण करेंगे तो कठिन पथ को पार करने और सत्य खोजने का रास्ता मिलेगा।
दूसरे सत्र में वरिष्ठ पत्रकार ऋतु भारद्वाज और लेखक सरोज दुबे से युवा पत्रकार ऋचा यादव ने मानसिक स्वास्थ्य पर ‘’टाइम टू टॉक अबाउट मेंटल हेल्थ’’ विषय के तहत बातचीत की।
तीसरा सत्र आदिवासी चिंतन : अस्तित्व का संघर्ष रहा। इसमें युवा पत्रकार कार्तिक द्विवेदी ने आदिवासियों पर लिखने वाले लेखक संदीप मुरारका से बात की।
चौथा सत्र सत्र कुछ राग-कुछ रंग विषय पर रहा। इसमें राजभाषा अधिकारी रोहित ने पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी और लेखक मृत्युंजय कुमार से बातचीत की।
पांचवे सत्र में वर्तमान परिवेश में उच्च शिक्षा विषय पर शोधार्थी ओजस्वी भट्ट ने शिक्षाविद डॉ. रचना विमल दुबे से बात की।
छठवें सत्र में संचालन जुमला जंक्शन विषय पर वरिष्ठ पत्रकार अरिंदम घोष ने किया। इसमें वरिष्ठ पत्रकार नीरज बधवार शामिल हुए।
अध्यक्षता बुन्देलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मुकेश पांडेय, स्वागत भाषण बृजेश दीक्षित व संचालन अनिरुद्ध सिंह रावत ने किया। अंत में निंदिया डांसपिरेशन एंड टीम एसारके, एलन हाउस पब्लिक स्कूल, मीराबाई ग्रुप की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया।
इस दौरान कार्यक्रम आयोजक चंद्रप्रताप, अनमोल दुबे, ज्योति वर्मा, दीपक प्रजापति, देव, निशा, निकिता, संजीव आदि उपस्थित रहे।