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वेब सीरीज बन रहा सिनेमा का विकल्प: प्रहलाद

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क्राफ्ट मेला मैदान में साहित्य मेले हुए युवा पढ़ेगा युवा बढ़ेगा विषय पर हुई परिचर्चा।
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झांसी। बुंदेलखंड साहित्य महोत्सव 2020 के अंतिम दिन साहित्य, सिनेमा और राजनीति पर दिलचस्प चर्चाएं हुईं। वरिष्ठ फिल्म समीक्षक प्रहलाद अग्रवाल ने कहा कि वेब सीरीज सिनेमा का एक विकल्प बन रहा है। कई नए तरह के विषय यहां दिखते हैं। यह मेन स्ट्रीम सिनेमा की तुलना में कम खर्चीला भी है लेकिन इसके अपने खतरे हैं।
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सिनेमा के इस वैकल्पिक फोरम को एक ताकतवर माध्यम बताते हुए रोहित मिश्र ने कहा ऑनलाइन सिनेमा दर्शक और सिनेमा के बीच की दूरी को कम कर रहा है। इनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि सेकेंड गेम्स और मिर्जापुर जैसी हिट वेब सीरीज के किरदार छोटे गांवों और कस्बों तक में लोकप्रिय हैं। ऑनलाइन दुनिया का यह सिनेमा तेजी से छोटे पर्दे के लिए चुनौती भी बनता जा रहा है। फिल्मी दुनिया से जुड़े अकबर कादरी और आजम कादरी ने कहा कि पश्चिम की तरह भारत में भी यह सिनेमा तेजी से अपनी जगह बनाता जा रहा है।
युवा लिखेगा, युवा पढ़ेगा शीर्षक वाले एक अन्य सत्र में युवा लेखक कुलदीप राघव ने कहा कि यह अच्छी बात है कि युवा साहित्य में दिलचस्पी दिखा रहा है। नए लेखकों की किताबों का तेजी से बिकना इस बात का संकेत है कि एक नई पीढ़ी हिंदी साहित्य में दिलचस्पी दिखा रही है। कार्यक्रम में बालेंदु द्विवेदी, मंगत अनमोल, राकेश नारायण द्विवेदी ने भी अपनी बात रखी। समापन समारोह में मंडलायुक्त सुभाषचंद्र शर्मा ने कहा कि इस कार्यक्रम से निश्चित ही लोगों को बुंदेलखंड की संस्कृति को जानने का मौका मिलेगा। संयोजक डॉ. पुनीत बिसारिया ने कहा कि मेहमानों के बिना यह सफल आयोजन संभव नहीं था। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरविंद कुमार कहा की साहित्य के बिना जीवन अधूरा है। वरिष्ठ साहित्यकार मैत्रीय पुष्पा ने कहा कि साहित्य की सेवा के बाद आज मात्र भूमि की सेवा करने का मौका मिला है। इस दौरान वरिष्ठजनों को सम्मानित भी किया गया। आभार आयोजन सचिव चंद्र प्रताप सिंह ने किया। इस दौरान धन्नूलाल गौतम, डॉ. नीति शास्त्री, डॉ. रेखा लगरखा और डॉ. सुनील त्रिवेदी मौजूद रहे।
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सालों पुरानी भाषा अब फिल्मों का हिस्सा
कार्यक्रम का एक और सत्र हिंदी फिल्मों में गायब होती भाषा को मौजूद श्रोताओं द्वारा पसंद किया गया। फिल्म समीक्षक दीपक दुआ ने कहा कि सालों पहले दिल्ली में बोली जाने वाली भाषा फिल्मों का हिस्सा बन गई। गीतकार शैलेंद्र के बेटे दिनेश शंकर शैलेंद्र ने भी शिरकत की। यहां पर शैलेंद्र की गानों पर लिखी एक किताब का विमोचन भी किया गया। एक अन्य सत्र सिनेमाई आंख से स्त्री में मुंबई से सुष्मिता मुखर्जी से शिरकत की। उन्होंने फिल्मी दुनिया द्वारा महिलाओं को देखने के नजरिए पर चर्चा की।
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