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किसान बाजार में ग्राहकों को लुभाने में दीवार बन रही अड़ंगा

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किसान बाजार के मुख्य द्वार पर हो​र्डिंग्स के कारण लगता ही नहीं की यहां कोई बाजार है।
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झांसी।गल्ला मंडी के नजदीक बने किसान बाजार की अस्सी फीसदी दुकानें ग्राहकों के अभाव में बंद हो र्गइं हैं। जो दुकानें खुली हैं उनमें भी मोबाइल के सर्विस सेंटर या ऑफिस खुले हैं। सुविधाओं के नाम पर न तो पीने का पानी मिल रहा है और न ही सफाई हो रही है। कीमती पेड़-पौधे सूख चुके हैं। सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगे हैं। पैसा वापस मिल जाए तो व्यापारी दुकानें छोड़ने तक को तैयार हैं।
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तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गल्ला मंडी के नजदीक एक नवंबर 2013 को आठ करोड़ से निर्मित किसान बाजार का लोकार्पण किया था। इस आधुनिक किसान बाजार में 122 दुकानें हैं। दुकानेें 99 साल के पट्टे पर दी गई हैं।
शुरूआत में किसान जोन की 22 दुकानों को सम्मानित कृषकों को 7.90 लाख रुपये में उपलब्ध कराया गया। यह किसान अभी तक कुल राशि का 25 फीसदी जमा कर चुके हैं। यूटीलिटी, फ्री, फूड और किड्स जोन की दुकानों को 11.15 लाख से अधिक राशि पर नीलाम किया गया था। तत्कालीन अफसरों ने व्यापारियों को बड़े-बड़े ख्वाब दिखाए कि यहां अंतर्राष्ट्रीय बाजार का माहौल दिया जाएगा। प्रचार-प्रसार कर दूर-दूर से ग्राहकों को बुलाया जाएगा। कार्यक्रम आयोजित होेंगे। इन हसीन ख्वाबों में फंसकर व्यापारियों ने अपने लाखों रुपये फंसा दिए। अधिकांश ने बैंक से ब्याज पर पैसा ले रखा है। सुंदर फर्नीचर लगवाया और दुकान खोलकर बैठ गए। किसान बाजार में एक से बढ़कर एक कपड़ों के शोरूम और खानपान की दुकानें खोली गईं। दो करोड़ की लागत से राठ के एक व्यापारी ने विराट फन खोलकर रखा है, जिसमें 9 डी थिएटर के साथ ही बच्चों के लिए एक से बढ़कर एक खेल उपलब्ध हैं। मगर, मंडी समिति की अनदेखी से यहां ग्राहकों की आवाजाही नहीं बढ़ सकी। ग्राहकी न होने से 102 दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान पर ताले डाल दिए हैं। जो दुकानें खुल रही हैं, उनमें ऑफिस या थोक व्यापार का संचालन हो रहा है। हालात यह है कि व्यापारियों को पैसा वापस मिल जाए तो वह दुकान छोड़ने तक को तैयार हैं।
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वहीं, 2017 में मेंटेनेंस का ठेका खत्म होने के कारण किसान बाजार में सुविधाओं का बुरा हाल हो गया है। जगह-जगह कूड़ा पड़ा है। दीवारों पर जाले लग गए हैं। पीने के पानी का एकमात्र वाटर फिल्टर खराब हो चुका है। शौचालय में गंदगी से पटे हैं। जगह-जगह दीवारें क्षतिग्रस्त होेने लगी हैं। टाइल्स निकल रहे हैं। सुरक्षा के नाम पर सीसीटीवी तक नहीं है। पेड़ पौधे सूख चुके हैं। चारों तरफ बदहाली का माहौल बनता जा रहा है।
- किसान बाजार में साफ- सफाई के लिए 21 मार्च को ई टेंडर होने जा रहा है। बिजली और शौचालय ठीक करा दिए गए हैं। बिजली विभाग में दुकानदारों के अलग- अलग मीटर लगाने के लिए प्रक्रिया चल रही है। साथ ही दीवार को छोटा करने के लिए उपनिदेशक निर्माण के पास प्रस्ताव भेजा गया है। बाजार में रौनक रहे, इसके लिए यहां बने हॉल को किराए पर कार्यक्रमों के लिए देने की तैयारी चल रही है।
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पंकज शर्मा, सचिव, कृषि उत्पादन मंडी समिति।
मैंने कपड़ों का शोरूम खोला था। ग्राहक न आने के कारण 25 से 30 लाख रुपये का घाटा हो गया। मजबूरन शोरूम बंद करना पड़ा।
असद उल्ला खान।
मैं छपाई का काम करता हूं। दुकान को 4200 रुपये महीने किराए पर ले रखा है। बार- बार बिजली कटने से काम नियमित नहीं कर पा रहा हूं।
पवन शर्मा।
बाजार में ग्राहक न आने का सबसे बड़ा कारण प्रवेश द्वार के सामने दीवार का बना होना है। यह दीवार हट जाए तो सड़क से निकलने वालों को बाजार दिखने लगेगा।
अजीत अग्रवाल।
विराट फन में दो करोड़ रुपये के मनोरंजन के साधन लगे हैं। ग्राहक न आने के कारण बिजली का बिल तक नहीं निकल पा रहा है।
अतुल श्रीवास्तव।
मैंने बड़ी उम्मीद से चाय और खाने की दुकान खोली थी। दुकानें न खुलने से सामान ही नहीं बिकता है। खर्चा तक नहीं निकल रहा है।
राजकुमारी।
बाजार में कई साल से सफाई नहीं हो रही है। पिछले दिनों एक समिति बनाकर दो- दो सौ रुपये एकत्रित कर सफाई कराई थी। फिर जस के तस हालत हो गए।
गिरीश वर्मा।
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