झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने वित्तीय अनियमितता समेत कई आरोपों में अवर अभियंता (सिविल) को बर्खास्त कर दिया है। जेई पर कार्य में लापरवाही, अनुशासनहीनता, मूल पत्रावलियां न देने, खुद के मौखिक आदेश पर लाखों के काम कराने समेत कई गंभीर आरोप हैं।
कुलसचिव नारायण प्रसाद की तरफ से जारी कार्यालय आदेश में कहा गया है कि सहायक अभियंता (सिविल) रत्न कुमार सिंह की शिकायत पर एक तकनीकी जांच समिति का गठन किया गया था। जांच समिति ने अपनी आख्या में जेई अंबरीश गौतम को सात छतों की मरम्मत कराने में गलत, फर्जी अथवा काल्पनिक मापें करने, कार्यादेश में उल्लेखित कामों के सापेक्ष कम कार्य कराने, कार्य में लापरवाही बरतने, मूल पत्रावलियां/माप पुस्तिका की जांच में उपलब्ध न कराने, जांच में बाधा पहुंचाने, अनुशासनहीनता करने, वित्तीय अनियमितता करके अधिक भुगतान कराने के आरोपों में प्रथम दृष्टया दोषी पाया है। जांच समिति ने जेई द्वारा 1,28,647 रुपये की बीयू को जानबूझकर वित्तीय हानि पहुंचाने में भी दोषी पाया है। कुलसचिव के मुताबिक जेई ने खुद के मौखिक आदेश से 59,60,614 रुपये के काम करा दिए। इस संबंध में स्पष्टीकरण का जवाब भी नहीं दिया। रसायन विज्ञान की लैब में कराए गए कामों को माप पुस्तिका में अंकित न करने, झलकारी बाई महिला छात्रावास के टॉयलेटों को बिना सक्षम स्तर की अनुमति के मरम्मत के नाम पर तोड़ने और उनको ठीक न कराने के कारण बीयू की संपत्ति को हानि पहुंचाने आदि में अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। कुलसचिव ने बताया कि कमेटी की सिफारिशों के आधार पर जेई की तत्काल प्रभाव से सेवा समाप्त कर दी गई है।