- वर्ष 2013 की सेल ब्राइट डिवाइस वर्तमान मेें हो गईं निष्प्रयोज्य
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस एंड क्रिमिनोलॉजी विभाग में मोबाइल फोरेंसिक लैब है। मगर यहां इस्तेमाल होने वाला सेल ब्राइट उपकरण काफी पुरानी तकनीक का है। 2013 में चलने वाले मोबाइल की जांच करने वाला यह उपकरण वर्तमान के 5जी जमाने में प्रयोग के लायक नहीं बचा। यही कारण है कि यहां प्रैक्टिकल भी नहीं हो पा रहे हैं।
बताते हैं पूर्व कुलपति डाॅ. अविनाश चंद्र पांडेय के कार्यकाल में फॉरेंसिक विभाग में मोबाइल फॉरेंसिक लैब बनाई गई। इसमें इलेक्ट्राॅनिक उपकरणों से डिलीट हुए डाटा को रिकवर करना और मोबाइल फोन के लॉक को डिकोड करना आदि सिखाया जाता था। लैब शुरू होने से अब तक तीन विभागाध्यक्ष बदल चुके हैं मगर किसी ने भी सेल ब्राइट उपकरण को अपडेट नहीं कराया। चूंकि इतने पुराने मोबाइल अब किसी के पास नहीं दिखते, इसलिए न ही प्रैक्टिकल कराना संभव हो रहा है और न ही विद्यार्थी नई तकनीक से रूबरू हो पा रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि जब तक सेल ब्राइट डिवाइस अपडेट नहीं होगी तब तक लैब किसी काम की नहीं।
वहीं विज्ञान विभाग के डीन आरके सैनी ने समस्या से अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि फॉरेंसिक विभाग की मोबाइल लैब की डिवाइस अपडेट नहीं है। विभागाध्यक्ष से इसके बारे में बात करके ही कुछ बता सकते हैं।