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उन्नीस थानों के मालखानों में गोलमाल... अब तो हेड मोहर्रिर भी चार्ज लेने से कर रहे इंकार

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झांसी। मंडल के 19 और झांसी जनपद के सात थानों के मालखानों में कुछ न कुछ तो गोलमाल है। अगर गड़बड़ी न होती तो हेड मोहर्रिर के तबादले के बाद दूसरे पुलिस वाले चार्ज लेने से न बचते हैं। कई थानों में तो तीन से चार साल से चार्ज नहीं लिया गया है। इनमें महानगर के प्रमुख थाने नवाबाद, प्रेमनगर और सीपरी बाजार भी शामिल हैं। अब डीआईजी ने इसे गंभीरता से लेते हुए पुलिस कप्तानों को आदेश दिए हैं कि मालखाने का रिकार्ड दुरुस्त कर तत्काल चार्ज सौंपे जाएं।
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किसी भी थाने में मालखाना सबसे महत्वपूर्ण होता है। पुलिस जिस भी समान को जब्त करती है वह यहीं रखा जाता है। इनकी बाकायदा सूची तैयार होती है। इसका एक रजिस्टर माल मुकदमाती बनता है, जहां सारे सामान को अंकित किया जाता है। इस पर केस नंबर के साथ कागज चस्पा होता है। संबंधित मामलों के निस्तारित न होने तक यह मुकदमाती माल कहलाते हैं। पुलिस सेवा नियमावली में थाने का प्रभारी एसओ होता है जबकि थाने के अंदर चलने वाले मालखाने का प्रभारी हेड मुहर्रिर होता है। मालखाने के अंदर सुई से लेकर रखी हर वस्तु का हिसाब-किताब उसे रखना होता है। उसके पास मालखाने की चाभी रहती है। तबादला होने पर मालखाने के अंदर रहने वाले एक-एक मुकदमाती माल का मिलान करके नए हेड मोहर्रिर को चार्ज दिया जाता है। इस समय मालखाने में मुकदमाती माल का अंबार लगा है। हजारों मुकदमाती माल होने से इनका मिलान नहीं हो पाता। पिछले महीने डीआईजी जोगेंद्र कुमार के आदेश के बाद जोन के सभी थानों के मालखाने का मिलान कराके उसकी रिपोर्ट तलब की गई। पुलिस अफसरों ने अपने जनपदों में प्रत्येक थाने के मालखाने का चार्ज हस्तांरित होने की बात कही लेकिन, पड़ताल में मालूम चला कि 19 थानों में मालखाने का हिसाब-किताब न हो पाने से इनका चार्ज हस्तांरित नहीं हो सका। इन थानों में मुकदमाती माल का हिसाब न मिलने से चार्ज लेने को कोई नया हेड मोहर्रिर राजी नहीं हो रहा। पिछले कई वर्षों से यह विवाद लगातार बना है। विवाद की बात एसएसपी तक भी पहुंच चुकी लेकिन, यह मामले अभी तक नहीं निपटे। डीआईजी ने सभी पुलिस कप्तानों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
इन थानों के मालखानों में फंसा है पेच
झांसी- नवाबाद, सीपरी बाजार, प्रेमनगर, बरुआसागर, शाहजहांपुर, गरौठा एवं गुरसराय
जालौन- डकार, कुठौंद, गोहन, रामपुरा, कैलिया एवं एट
ललितपुर- वानपुर, पाली, बार, पूराकला, मडावरा एवं गिरार
अदालती आदेश पर बुलाए जाते हैं हेड मुहर्रिर
तीन साल पुराने सभी मुकदमों के माल निस्तारण या मुकदमों से संबंधित माल को अदालत तक पहुंचाने में अकसर दिक्कत होती है। कई बार पुलिस को समय पर मुकदमाती माल न पेश करने के चलते अदालत से फटकार खानी पड़ती है। फटकार के बाद भी जब मुकदमाती माल पेश नहीं होता तब मजबूरन अदालत आदेश करती है। अदालत के आदेश पर संबंधित हेड मुहर्रिर को बुलाकर उसकी निगरानी में माल को अदालत में भेजा जाता है।
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जिन थानों के मालखाने का चार्ज हस्तांतरण नहीं हुआ उसके संबंध में जिस कर्मचारी के पास मालखाने का चार्ज है, उसको बुलाकर चार्ज हस्तांतरण की कार्रवाई कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्य वरीयता के आधार पर कराना होगा। अगले सप्ताह इसका भौतिक सत्यापन मैं खुद करुंगा।
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जोगेंद्र कुमार
डीआईजी
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