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ब्लैक फंगस के दो नए मरीज मिले

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झांसी में ब्लैक फंगस के दो नए मरीज मिले
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झांसी। जिले में ब्लैक फंगस के दो नए केस सामने आए हैं। इनमें 25 साल का युवक भी शामिल है। युवक को डायबिटीज नहीं है। डॉक्टरों का अनुमान है कि ज्यादा स्टेरॉयड की वजह से युवक इस बीमारी की चपेट में आ गया।
कोरोना महामारी के बीच झांसी में ब्लैक फंगस से हालात डरावने होते जा रहे हैं। सरकारी अस्पताल ही नहीं नर्सिंगहोमों में भी तेजी से इस बीमारी के मरीज सामने आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित एक निजी अस्पताल में पिछले दस दिनों में लगभग 20 ब्लैक फंगस के केस मिल चुके हैं।
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वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जेपी पुरोहित ने बताया कि शनिवार को भी दो नए मामले ब्लैक फंगस के आए हैं। इनमें शहर के एक युवक को मधुमेह भी नहीं है। उन्होंने बताया कि ब्लैक फंगस के लिए जिंक भी मुफीद है। कोरोना काल में लोगों ने जिंक का भी खूब सेवन किया। हालांकि, ये शोध का विषय भी है। उन्होंने बताया कि कोरोना के मरीजों के इलाज के दौरान एकदम से स्टेरॉयड की हाई डोज नहीं चलानी चाहिए। यदि मरीज को कम डोज में ही आराम मिल जाए तो ज्यादा देने की जरूरत नहीं है। मधुमेह के मरीज को तो स्टेरॉयड की डोज कभी भी ज्यादा नहीं देनी चाहिए।
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कइयों को तो ऑक्सीजन भी नहीं लगी
ब्लैक फंगस के मामलों में ये भी कहा जा रहा है कि मेडिकल के बजाए कई कोरोना मरीजों ने औद्योगिक ऑक्सीजन का इस्तेमाल किया। चूंकि, मेडिकल की तुलना में औद्योगिक ऑक्सीजन कम शुद्ध होती है, इसलिए मरीज ब्लैक फंगस की चपेट में आ गए। मगर डॉ. पुरोहित के मुताबिक उनके पास ब्लैक फंगस के कई मरीज ऐसे भी सामने आए, जिन्हें ऑक्सीजन लगी ही नहीं। वो होम आइसोलेट रहते हुए कोरोना से ठीक हो गए। हालांकि, वे मधुमेह का जरूर शिकार थे और उन्हें हाई डोज स्टेरॉयड चली।
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