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नगर निगम के दायरे में आएंगे बिजौली औद्योगिक क्षेत्र व ग्रोथ सेंटर

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झांसी। बिजौली ग्रोथ सेंटर और औद्योगिक क्षेत्र नगर निगम को हस्तांतरित किए जाएंगे। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उद्यमियों की मांग पर ये पहल की गई है। हालांकि, इसके लिए नगर निगम की ओर से 16 करोड़ रुपये की मांग की गई है। उद्योग विभाग ने शासन से ये बजट मांगा है।
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बिजौली औद्योगिक क्षेत्र 200 एकड़ और ग्रोथ सेंटर 400 एकड़ के विस्तृत क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहां 298 औद्योगिक भूखंड और 716 आवासीय भूखंड है। बुनियादी सुविधाओं के मामले में ये खासा पिछड़ा हुआ है। साफ-सफाई यहां नियमित तौर पर नहीं होती है, जबकि सड़कों की मरम्मत की मांग भी यहां हमेशा बनी रहती है। स्ट्रीट लाइट का भी भारी अभाव है। इन सभी कामों के लिए उद्योग विभाग को मुख्यालय से बजट की मांग करनी पड़ जाती है, जो अक्सर समय से नहीं मिल पाता है। इससे निजात पाने के लिए उद्यमियों की ओर से पिछले काफी समय से ग्रोथ सेंटर और औद्योगिक को नगर निगम में शामिल करने की मांग की जा रही थी। तीन महीने पहले इसकी प्रक्रिया शुरू की गई थी। यूपीएसआईडीसी और उद्योग विभाग की सहमति के बाद नगर निगम द्वारा दोनों क्षेत्रों का सर्वे किया गया था। इसके बाद नगर निगम की ओर से 16 करोड़ रुपये की मांग की गई है। निगम ये धनराशि सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट, सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च करेगा। तत्पश्चात औद्योगिक क्षेत्र और ग्रोथ सेंटर को निगम द्वारा अपने दायरे में लिया जाएगा। उद्योग विभाग की ओर से मुख्यालय से बजट की मांग की गई है। संभावना जताई जा रही है कि दोनों ही औद्योगिक क्षेत्र एक अप्रैल 2022 से नगर निगम के दायरे में आ जाएंगे।
बिजौली औद्योगिक क्षेत्र और ग्रोथ सेंटर नगर निगम को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया तेजी से जारी है। विभागों के साथ उद्यमियों की भी इस पर सहमति है। नगर निगम द्वारा मांगे गए बजट की मुख्यालय से मांग की गई है। आगामी एक अप्रैल से क्षेत्र के रखरखाव की जिम्मेदारी का निर्वहन नगर निगम द्वारा किया जाएगा।
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- मनीष चौधरी, उपायुक्त उद्योग
उद्यमियों की ओर से ही दोनों औद्योगिक क्षेत्रों को नगर निगम में शामिल कराने की मांग की गई थी। निगम द्वारा इनका बेहतर रखरखाव किया जा सकेगा। उद्यमियों की सहूलियतें बढ़ेंगी।
- राजेश शर्मा, अध्यक्ष - चैंबर ऑफ स्मॉल एंड माइक्रो इंडस्ट्री
दोनों औद्योगिक क्षेत्रों में अव्यवस्थाएं हावी हैं। साफ-सफाई तक नियमित नहीं होती है। नगर निगम के दायरे में आने से ये परेशानियां नहीं रहेंगी। निगम की आय भी बढ़ेगी।
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- साकेत गुप्ता, महामंत्री - चैंबर ऑफ स्मॉल एंड माइक्रो इंडस्ट्री
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