अप्रैल महीने की शुरुआत से जब डिमांड एक बारगी काफी बढ़ गई तब इन्होंने खाली शीशियों के लिए मेडिकल कॉलेज गेट नंबर एक पर स्थित मेडिकल स्टोर में काम करने वाले विशाल विरथरे समेत प्राइवेट नर्सिग होम में काम करने वाले हिमांशु, हरेंद्र, मानवेंद्र, सचिन से संपर्क किया और सभी को अपने साथ मिला लिया। यह सभी ग्राहक भी लेकर आते थे।
आसपास के नर्सिग होम में जितनी भी शीशियां खाली होती थीं, ये लोग अपने संपर्क से उसे अपने पास मंगा लेते थे। खाली शीशियों में डिस्टिल वाटर समेत एंटीबायोटिक मिलाकर ग्राहकों को ऊंची कीमत पर बेच दिया जाता था। एसटीएफ के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि जो इंजेक्शन बाहर से आते थे, वह मरीज को नहीं लगाते थे। जानबूझकर विलंब करके मरीज के मरने का इंतजार करते थे। मरीज के मरते ही इंजेक्शन गायब कर देते थे।
एसटीएफ ने आरोपियों की निशानदेही पर ढाई लाख रुपये नकद समेत एक दर्जन रेमडेसिविर की खाली शीशियां भी बरामद की हैं। एसटीएफ ने सभी को गिरफ्तार कर लिया है लेकिन, एक पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया।