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मित्र कहना और मित्र का भाव होना दोनों में बड़ा अंतर : हरिवंश

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संवाद न्यूज एजेंसी



झांसी। बजरंग कालोनी में आयोजित रुद्र महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा में भगवताचार्य हरिवंश दास महाराज ने कहा कि मित्र कहना और मित्र का भाव होना दोनों में बहुत बड़ा अंतर है।



उन्होंने कहा कि व्यक्ति से मनुष्य बनने की यात्रा में विवेक सबसे बड़ी भूमिका निभाता है और विवेक की उत्पत्ति सिर्फ सत्संग से होती है। उन्होंने कहा कि जीव के कल्याण का एकमात्र साधन हरि भजन है। उन्होंने श्रीकृष्ण और सुदामा जी की मित्रता का सुंदर वर्णन किया।
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कथा अवसर पर श्रीमद्भागवत की पूजा एवं आरती पूर्व विधायक कैलाश साहू, अनिल खरे, डा. नीरज श्रीवास्तव, गौरीशंकर दुबे, सुशील शर्मा, अरविद नगाइच, अवधेश निरंजन, आलोक यादव, मैथिली मुदगिल, रमाकांत तिवारी, अपूर्व शर्मा, राकेश तिवारी ने की। संचालन राष्ट्रभक्त संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष अंचल अडजरिया ने एवं आभार संजय दुबे ने व्यक्त किया।
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