झांसी। बुंदेलखंड के उच्च वर्ग में इन दिनों शादियों के लिए जन्म कुंडली के साथ ही ‘मेडिकल कुंडली’ का भी मिलान कराया जा रहा है। दिनोंदिन असाध्य रोगों का बढ़ता दायरा और वंशानुगत (हेरिडिटिकल) बीमारियों से नव दंपती और आगे बढ़ने वाले परिवार को बचाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। उच्च आय वर्ग, राजनीतिक, उद्योग घरानों में इसका चलन अधिक है। ग्रह मैत्री, गुण व ज्योतिष के अन्य मानकों पर कुंडली के खरा उतरने के बाद लड़का और लड़की के घर वाले उनके पूरी तरह स्वस्थ होने के पैथोलॉजी प्रमाण भी मांग रहे हैं। कई परिवार तो लखनऊ, दिल्ली, ग्वालियर, आगरा की खास लैबोरेट्री से ही जांच रिपोर्ट तक मांग रहे हैं।
नवरात्र हर लिहाज से शुभ माने जाते हैं। खासतौर शादी के लिए रिश्ते की बात, वर या वधू को देखना और अपने मानकों पर चयन करना, कुंडली का मिलान कराना व रिश्ता पक्का करने के लिए लोग नवरात्र का इंतजार करते हैं। इस नवरात्र बुंदेलखंड के उच्च आय वर्ग, राजनीतिक परिवारों, औद्योगिक और बड़े कारोबारी परिवारों में एक नया चलन सामने आया है। ये लोग अपने बेटे, बेटी के विवाह के लिए उनकी ‘मेडिकल कुंडली’ का भी मिलान करा रहे हैं। पैथोलॉजी जांच कर यह पता करा रहे हैं कि कहीं लड़के या लड़की को कैंसर, एड्स, डायबिटीज, लिवर सिरोसिस, अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर या कोई गंभीर रोग तो नहीं है। विशेषज्ञ डॉक्टरों से यह भी पता लगा रहे हैं कि निकट भविष्य में होने वाली बहू या दामाद को किसी वंशानुगत बीमारी का खतरा तो नहीं है।
इसलिए करा रहे जांच
- कम उम्र में ही कैंसर, हार्ट अटैक के अधिक मामले सामने आ रहे हैं
- नवदंपती के स्वस्थ दिखने के बावजूद गर्भधारण में समस्याएं बढ़ी हैं
- गर्भधारण होने पर मिसकैरेज के मामले बढ़े हैं
- बहुत कम उम्र के लड़के लड़कियाें में डायबिटीज, ब्लड प्रेशर की शिकायत
- बच्चों में जन्म से डायबिटीज व अन्य रोगों के मामले भी प्रकाश में आ रहे हैं
- माता-पिता के स्वस्थ रहने के बावजूद बच्चों में जन्म से कई बीमारियों का होना
- 35 वर्ष या कम आयु की महिलाआें का तमाम रोगों की गिरफ्त में आना
दयालबाग में तो अस्पताल के प्रमाण पत्र के बाद ही होती है शादी
आगरा के दयालबाग संप्रदाय में होने वाले विवाह संगम (शादी समारोह) से पहले लड़के-लड़की की काउंसलिंग और वहां स्थित शरण आश्रम अस्पताल में दोनों की मेडिकल जांच के बाद ही शादी संपन्न कराई जाती है। झांसी में रहने वाले उत्तर प्रदेश राधास्वामी सत्संग एसोसिएशन के रीजनल मैनेजर राजकुमार साहू के अनुसार दयालबाग में शादी कराने के इच्छुक परिवारों को यह प्रक्रिया अपनानी होती है। शादी की रस्म के लिए वहां के अस्पताल का सर्टिफिकेट लगता है। यह नए जीवन की शुरुआत कर रहे दंपती के स्वास्थ्य लिए अच्छा भी है।
‘ज्योतिष एक वैज्ञानिक विधा है। शादी के लिए उच्च आय वर्ग में मेडिकल जांच रिपोर्ट का चलन तो अब शुरू हो रहा है। ज्योतिष में नाड़ी मिलान, गुण, ग्रह मैत्री देख कर ही विवाह तय होता है। लोग दरअसल रस्म निभाने तक अधिक सीमित हो गए हैं। मुहूर्त निकल जाता है सभी का ध्यान नाच, गाने, खान-पान पर रहता है। पापक ग्रह के सक्रिय होने पर पाणिग्रहण संपन्न होते हैं फिर कुंडली दिखाने का मतलब ही क्या रहा। लोग अपनी संतुष्टि के लिए मेडिकल जांच करा रहे हैं इसमें कोई बुराई तो नहीं पर सबकुछ सही होने पर अगर शादी के बाद किसी को रोग लग जाए तो क्या करेंगे। इसलिए प्रकृति को बहुत नियंत्रित करने से बचना चाहिए’
महंत विष्णु दत्त स्वामी, ज्योतिषाचार्य
‘मेडिकल साइंस के अनुसार शादी के दौरान को सैंग्विटी नहीं होनी चाहिए। शायद इसीलिए ज्योतिष एक ही नाड़ी या समगोत्रीय विवाह की मनाही करता है। लोग स्वस्थ और सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करना चाहते हैं। इसलिए कुछ लोग शादी से पहले मेडिकल टेस्ट कराते हैं। हालांकि वंशानुगत होने पर भी युवा उम्र में कैंसर व अन्य रोगों की संभावना अधिक नहीं रहती जबतक कि कोई पान मसाला, शराब या हानिकारक तत्वों का अधिक सेवन नहीं करता’
डॉ.मयंक सिंह, माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज