प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का रणनीति स्थल बालाबेहट का किला प्रशासनिक उपेक्षा के चलते बदहाल है। राजा मर्दन सिंह के इस किले में कभी आजादी की लड़ाई की गोपनीय रणनीति बनाई जाती थी, पर अब इसका पुरसाहाल नहीं है। मूलभूत सुविधाएं न होने के कारण यहां सैलानी भी आने से कतराते हैं। तीन साल पहले शासन ने किले के जीर्णोद्धार के लिए एक करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया था, लेकिन बदहाली का आलम ज्यों का त्यों है।
ललितपुर मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर कस्बा बालाबेहट में यह प्राचीन किला मौजूद है। इतिहासकारों के अनुसार पंद्रह से सोलहवीं शताब्दी में गौंड़ राजाओं ने इसका निर्माण कराया था। मराठा शासक राजा गंगाधर राव ने इसका जीर्णोद्धार करवाया था।
पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार बालाबेहट मराठा रियासत का अंतिम गांव था। 1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों से मोर्चा लेने वाले क्रांतिकारियों के रुकने का यह बड़ा अड्डा था। किले में बुर्ज, परकोटा, रानीमहल, हाथी दरवाजा एवं बावड़ी मौजूद है। यह सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र हो सकती है। लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यहां पहुंचने के लिए न अच्छी सड़क है और न ही वहां पानी की व्यवस्था।
तीन साल पहले 13वें वित्त आयोग से इस किले के लिए एक करोड़ का बजट जारी किया गया था। इससे किले में रानी महल, हाथी दरवाजा का निर्माण करवाया गया था। किले को गौंड़ राजाओं ने जागीर मिलने के बाद बनवाया था। यह किला प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांति की रणनीतियों का प्रमुख केंद्र हुआ करता था।-एसके दुबे, मंडलीय पुरातत्व अधिकारी