झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण की कारोबार और रोजगार पर भी बड़ी मार पड़ी है। हालात ये हैं कि कारोबार के लिए बैंकों द्वारा दिया गया 43 करोड़ रुपये का कर्ज डूब गया है। झांसी और ललितपुर जिले के 4,600 कर्जदार लिए गए ऋण की अदायगी नहीं कर पा रहे हैं। इन लोगों ने बैंकों में किस्तें जमा करना बंद कर दीं हैं। इनमें से ज्यादातर वे लोग हैं, जिनका कारोबार लॉकडाउन के दौरान या तो बंद हो गया या फिर अब तक मंदी की चपेट में बना हुआ है। तमाम कोशिशों के बाद भी बैंक इनसे वसूली नहीं कर पा रहे हैं।
खुद का छोटा-मोटा व्यवसाय शुरू करना हो या व्यवसाय को आगे बढ़ाना हो, इसके लिए साल 2015 में केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मुद्रा ऋण योजना की शुरूआत की गई थी। इसके तहत कर्ज लेने वालों को प्रोसेसिंग शुल्क नहीं देना पड़ता है। साथ ही औपचारिकताएं पूरी कर आसानी से बैंकों द्वारा ऋण उपलब्ध करा दिया जाता है। इस योजना के तहत झांसी जिले में 18 हजार लोगों को एक अरब 36 करोड़ रुपये का कर्ज बैंकों द्वारा जारी किया जा चुका है। जबकि, ललितपुर में 11 हजार लोगों को 78 करोड़ रुपये का ऋण बांटा जा चुका है। लेकिन, इनमें से झांसी के 3000 हजार कर्जदारों पर बैंकों का 26 करोड़ और ललितपुर के 1600 कर्जधारकों पर बैंकों का 17 करोड़ रुपया डूब गया है।
कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए मार्च 2020 में लागू किए गए लॉकडाउन की वजह से हालात ज्यादा खराब हुए हैं। महीनों कारोबार बंद रहने की वजह से तमाम कारोबारी मंदी की चपेट में आ गए। इनमें से कई तो हालात सामान्य होने के बाद भी मंदी से उबर नहीं पा रहे हैं। कइयों के कारोबार तक बंद हो गए है, जिससे बैंकों की करोड़ों की रकम डूब गई है।
केस - 1
कारोबार शुरू किया, लेकिन चल नहीं पाया
झांसी। एक युवा ने ऑटो पार्ट्स की दुकान के लिए बैंक से सात लाख रुपये का कर्ज लिया था। दुकान खोलकर कारोबार शुरू किया, इससे पहले कि कारोबार रफ्तार पकड़ पाता, लॉकडाउन लागू हो गया। महीनों काम बंद रहा। हालात सामान्य होने के बाद भी कारोबार सामान्य स्थिति में नहीं पहुंच पाया। कर्ज चुकाना तो दूर की बात, पूंजी तक निकालना मुश्किल हो गया। दुकान बंद करनी पड़ गई।
केस - 2
एक बार गिरा शटर फिर उठ नहीं पाया
झांसी। गुदरी बाजार निवासी एक युवा ने साल 2019 में प्रधानमंत्री मुद्रा ऋण योजना के तहत बैंक से छह लाख रुपये का ऋण लिया था। इस रकम से उन्होंने रेडीमेड कपड़ों का कारोबार शुरू किया था। काम शुरू करने के पांच महीने बाद लॉकडाउन लागू हो गया, जिससे दुकान बंद करनी पड़ गई। इसके बाद दुकान का शटर दुबारा नहीं खुल पाया। कर्जदार अब कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं है।
केस - 3
कर्जदार ही हो गया लापता
झांसी। मऊरानीपुर निवासी एक व्यक्ति की ग्वालियर रोड पर फ्रेब्रिकेशन की दुकान थी। कारोबार आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने मुद्रा ऋण योजना के तहत बैंक से तीन लाख रुपये का ऋण लिया था। इसमें से एक लाख रुपये की अदायगी भी कर दी थी। लेकिन, बाकी रकम चुकाने से पहले उनकी लॉकडाउन में दुकान बंद हो गई। छानबीन में पता चला कि वो दुकान खाली कर चला गया है। बैंकों को उसकी जानकारी नहीं मिल पा रही है।
केस - 4
दो लाख चुकाए, तीन लाख अटके
झांसी। कपड़ों के कारोबार के लिए एक व्यक्ति ने बैंक से पांच लाख रुपये का ऋण लिया था। कर्ज की नियमित रूप से अदायगी भी शुरू कर दी थी और दो लाख रुपये चुका भी दिए थे। इसी बीच कोरोना काल में कारोबार संचालक की मृत्यु हो गई, जिससे व्यवसाय बंद हो गया। ऐसे में बैंक की तीन लाख रुपये की रकम फंसी हुई है, जिसकी तमाम कोशिशों के बाद भी अदायगी नहीं हो पा रही है।
प्रधानमंत्री मुद्रा ऋण योजना के तहत नए कारोबार को शुरू करने व पुराने कारोबार को गति देने के लिए ऋण प्रदान किया जाता है। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बैंक आसानी से कर्ज दे देते हैं। अदायगी न करने वालों का खाता एनपीए में डाल दिया जाता है। ऐसे लोगों से नियमानुसार वसूली की जाती है।
- अरुण कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक