एक और दो रुपये के सिक्के भारतीय मुद्रा में शामिल हैं, लेकिन व्यवहारिक तौर पर चलन से लगभग बाहर हो चुके हैं। कमोबेश यही स्थिति अब पांच और दस रुपये के सिक्कों की भी बनती जा रही है। हालात ये हैं कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) भी सिक्के बैंकों से वापस ले नहीं रहा है, बल्कि उपलब्ध लगातार कराए जा रहे हैं। इससे बैंकों के खजाने में सिक्कों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। बुंदेलखंड के बैंकों में दस करोड़ रुपये से अधिक की रेजगारी है।
दो दशक पहले तक पांच, दस और पच्चीस पैसे के सिक्के मुठ्ठी में आने पर बच्चों के चेहरे पर मुस्कान जा आती थी। लेकिन, अब हालात एकदम इतर हैं। एक-दो रुपये के सिक्के तो भिखारियों तक ने लेना बंद कर दिए हैं। यही स्थिति पांच और दस रुपये के सिक्कों के साथ भी बनती जा रही है। बैंकों में ये सिक्के ग्राहकों की ओर से लगातार आ रहे हैं। कर्मचारियों द्वारा लेने से आनाकानी करने पर अक्सर बैंक कर्मियों और ग्राहकों के बीच नोकझोंक की स्थिति बन जाती है।
वहीं, आरबीआई की ओर से भी बैंकों को लगातार सिक्के उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पांच सौ और दो हजार के नोटों के साथ निर्धारित संख्या में सिक्के भी बैंकों के खजाने में पहुंचा दिए जाते हैं। स्थिति ये है कि ज्यादातर बैंकों के खजाने में सिक्कों से भरी बोरियों के ढेर लगे हैं। यही स्थिति दस के नोटों की गड्डियों की भी है। इनकी भी बैंकों में भरमार है। इन हालातों में बैंक कर्मचारियों को नोटों को रखने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद, इसके समस्या का निकट भविष्य में निदान होता नजर नहीं आ रहा है।
नवंबर के बाद से नहीं लिए दस के नोट
छोटी करंसी रखने में परेशानी का सामना कर रहे बैंकों को आरबीआई की ओर से नवंबर में कुछ राहत दी गई थी। आरबीआई ने दस के नोटों की गड्डियां बैंकों से वापस लीं थीं। लेकिन, उपलब्धता के अनुसार कम ही दस के नोट वापस लिए गए थे। इसके बाद से आरबीआई ने छोटे नोट नहीं लिए। वहीं, सिक्के तो आरबीआई की ओर से वापस लिए ही नहीं जा रहे हैं।
बैंकों के सामने छोटी करंसी रखने की समस्या तो बनी हुई है, लेकिन आरबीआई की ओर से जल्द ही इसके निस्तारण के उपाय किए जाएंगे। इस दिशा में प्रयास लगातार जारी हैं।
- अरुण कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक
सिक्के और छोटे नोट रखने में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नवंबर में दस रुपये के नोट तो आरबीआई ने लिए थे, लेकिन सिक्के नहीं लिए गए। खजाने में इनका ढेर लगा हुआ है।
- आरके वर्मा, वरिष्ठ प्रबंधक - पीएनबी