झमाझम बारिश न होने के कारण जुलाई में भी झांसी और ललितपुर के बांध (डैम) खाली हैं। भोपाल में भी ताल नहीं भरने से पानी आगे नहीं बढ़ पा रहा है। अगर, ऐसी ही स्थिति बनी रही तो आगे पेयजल का संकट भी उत्पन्न हो सकता है। झांसी जिले में अभी तक 111 मिमी और ललितपुर में 90 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
मध्य प्रदेश के भोपाल और विदिशा में झमाझम बरसात होने के बाद भी राजघाट, माताटीला समेत अन्य बांधों का जलस्तर जस का तस है। दरअसल, अभी भोपाल का तालाब पूर्ण क्षमता के साथ नहीं भर सका है। तालाब के ओवर फ्लो होने पर ही बेतवा नदी में पानी आगे बढ़ सकेगा। नदी का पानी सबसे पहले ललितपुर जिले के राजघाट बांध में रोका जाता है। इस बांध से छूटा पानी माताटीला बांध को भरता है। माताटीला बांध से छोड़ा गया पानी सुकुंवां- ढुकुवां और पारीछा बांध से होता हुआ जालौन, हमीरपुर तक पहुंचता है। माताटीला बांध से पहूज बांध और दतिया के अंगूरी बैराज बांध को भी पानी दिया जाता है।
जुलाई में अभी तक बरसात कम होने के कारण बांधों के जलस्तर में कोई अंतर नहीं आया है। माताटीला बांध का जलस्तर 1012 फीट है और इस समय बांध में 987.60 फीट पानी है। इस हिसाब से बांध 25 फीट खाली चल रहा है। राजघाट बांध भी करीब तीस फीट खाली है। जलनिगम पीने का पानी देने के लिए माताटीला बांध से 984 फीट तक ही पानी बांध से ले सकता है, इसके बाद पंप चलाने में अड़चन शुरू हो जाती है। पिछली बार झांसी में कम पानी बरसा था, लेकिन भोपाल में अच्छी बरसात हो जाने के कारण बांध भर गए थे। इसीलिए अब इंतजार किया जाने लगा है कि भोपाल में ऐसी ही बरसात होती रहे तो बांधों में पानी आ जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि साढ़े तीन फीट जलस्तर से छह माह तक पीने का पानी दिया जा सकता है। जलस्तर नहीं बढ़ा तो जुलाई में खरीफ की फसल की सिंचाई के लिए नहरें चलाना भी संभव नहीं होगा।
अभी तक बांदा में सबसे अधिक वर्षा
बुंदेलखंड के सातों जिलों में अभी तक सबसे अधिक 197 मिमी वर्षा बांदा में दर्ज की गई। इसके अलावा झांसी में 111 मिमी, ललितपुर में 90 मिमी, उरई में 43 मिमी, हमीरपुर में 92 मिमी, ललितपुर में 90 मिमी, महोबा में 129 मिमी और चित्रकूट में 157 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
अन्य बांधों का हाल
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विभागीय जानकारी के अनुसार सुकवां ढुकुवां बांध में 20.95 मिलियन घन मीटर, पारीछा बांध में 12.26 मिलियन घन मीटर, डोंगरी बांध में शून्य, खपरार बांध में 2.66 मिलियन घन मीटर, पहूज बांध में 2.8 मिलियन घन मीटर, सपरार बांध में 21.18 मिलियन घन मीटर, पहाड़ी बांध में 7.27 मिलियन घन मीटर, लहचूरा बांध में शून्य, बड़वार झील में 7.78 मिलियन घन मीटर उपयोगी पानी बचा है। सपरार बांध का हाल भी बुरा है। सपरार बांध से मऊरानीपुर क्षेत्र की दो लाख आबादी को पीने का पानी मुहैया कराया जाता है। बांध का पूर्ण जलस्तर 224.64 मिलियन घन फीट है, लेकिन बारिश नहीं होने से पानी तलहटी में पहुंच गया है।
सात सालों में सबसे कम बरसात
पिछले सात सालों में जुलाई महीने में इस बार सबसे कम बरसात हुई। 2011 में 296.60 मिमी, 2012 में 288.76 मिमी, 2013 में 328.24 मिमी, 2014 में 144.18 मिमी, 2015 में 226.26 मिमी, 2016 में 269.66 मिमी और 2017 में 144.54 मिमी वर्षा दर्ज की गई। उक्त सालों में क्रमश: 797.20 मिमी, 870.08 मिमी, 678.94 मिमी, 1078 मिमी, 402 मिमी, 384 मिमी, 540 मिमी और 381.80 मिमी कुल बरसात हुई।