अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। इस दफा भी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के विवाह की वर्षगांठ धूमधाम से मनाने की तैयारी है। शुक्रवार को अमर उजाला के बैनर तले ऐतिहासिक गणेश मंदिर में आयोजित संवाद के दौरान महाराष्ट्र गणेश मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने विस्तार से चर्चा की।
महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी के सचिव गजानन खानवलकर ने कहा कि वर्ष 2014 में अमर उजाला के साथ मिलकर रानी की शादी की वर्षगांठ मनाने की पहल हुई थी। इस साल भी 19 मई को मराठी और बुंदेली रीति रिवाज से पूरे झांसी के लोग बाई सा की शादी की वर्षगांठ उत्सव की तरह मनाएंगे। हर समाज का व्यक्ति इसमें शामिल रहेगा।
शिक्षिका कादंबिनी मिश्रा ने बताया कि शोभायात्रा में फूलों से सजी बग्घी में बाई सा एवं श्रीमंत गंगाधर राव के स्वरूप विराजमान होंगे। उनके पीछे सात घोड़ों में रानी की सहेलियां, ओरछा नरेश, समथर नरेश व नाना साहेब के स्वरूप शामिल होंगे। इसकी तैयारी की जा रही है। शिक्षिका श्यामली सिंह ने बताया कि मराठी वेशभूषा में महिलाएं एवं छात्राएं भी शोभायात्रा का हिस्सा बनेंगी। इसको लेकर सब में उत्साह है। शिक्षिका सीमा शर्मा के मुताबिक इस कार्यक्रम को लेकर सभी में उत्सुकता है। घर-परिवार में तैयारियां की जा रही हैं।
आयोजन समिति के सचिव सुदेश शिवहरे का कहना है कि इसके जरिये नई पीढ़ी के लोग अपनी पुरानी परंपरा से जुड़ते हैं। कमेटी युवाओं को जोड़ने की कोशिश करती है। आयोजन में सक्रिय रहने वाले प्रभात सक्सेना ने कहा कि मनु झांसी आकर लक्ष्मीबाई बनीं। आज पूरे विश्व में उनका नाम है।
वरिष्ठ सदस्य मनमोहन मनु भी इसे नई पीढ़ी को जोड़ने का तरीका मानते हैं। परंपरागत वेशभूषा में युवाओं का शामिल होना महारानी लक्ष्मी बाई के साथ हमारा जुड़ाव बताता है। अधिवक्ता एवं कमेटी के पदाधिकारी उज्ज्वल देवधर ने इसे पुरानी परंपरा का सम्मान करने का अवसर बताया। उनका कहना है कि शादी की वर्षगांठ के दिन करीब आने के साथ नई स्फूर्ति आती है, जिसकी मदद से यह आयोजन संभव हो पाता है।
शिक्षिका अरुणा, सीमा शर्मा, ममता निगम, सोनिया नायक, ऊषा खानवलकर, अंजना तिवारी ने भी बाई सा की शादी की वर्षगांठ में शामिल होने को अहम अवसर बताया।
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शाम पांच बजे निकलेगी बरात
श्रीलक्ष्मी व्यायाम मंदिर प्रांगण से शाम पांच बजे बरात की शोभायात्रा निकलेगी। यह पंचकुइयां चौराहा, कोतवाली, सिंधी चौराहा, मानिक चौक, सराफा बाजार, गंदीगर का टपरा होते हुए सात बजे गणेश मंदिर पहुंचेगी। यहां श्रीमहंत गंगाधर राव नेवालकर एवं रानी लक्ष्मीबाई के प्रतीकात्मक विवाह की रस्म पूरी होगी। मराठी रीति रिवाज के मुताबिक अतिथियों को पान-सुपारी, इत्र, मिष्ठान एवं महिलाओं को कुमकुम दिया जाएगा। वहीं, इससे ठीक एक दिन पहले 18 मई को मेहंदी और संगीत कार्यक्रम होगा। इसको लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं।
19 मई 1842 को हुआ था विवाह
महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी के सचिव गजानन खानवलकर बताते हैं कि झांसी के इतिहास की महत्वपूर्ण तारीखों में से एक 19 मई 1842 है। यह वही दिन था, जब काशी की बेटी मणिकर्णिका (मनु) का विवाह झांसी के राजा गंगाधर राव के साथ हुआ था। इसी दिन महाराष्ट्रीय परंपरा के अनुसार मनु को शादी के बाद नया नाम लक्ष्मीबाई दिया गया था। रानी की शादी की सालगिरह मनाने की शुरुआत 19 मई 2016 को शादी की 174वीं सालगिरह मनाने के साथ हुई। इससे पहले किसी को रानी की शादी की तारीख की जानकारी नहीं थी।