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वाणिज्यिक एवं औद्योगिक इकाइयों को देना होगा पाताली पानी का हिसाब

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जल विभाग ने पानी का हिसाब लेने की तैयारी शुरू कर दी है। - फोटो : ???? ????
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वाणिज्यिक एवं औद्योगिक इकाइयों को देना होगा ‘पाताली पानी’ का हिसाब
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झांसी। वाणिज्यिक एवं औद्योगिक इकाइयों को अब भूगर्भ जल का हिसाब देना होगा। 90 पैसे से लेकर 1.50 रुपये प्रति घन मीटर प्रतिदिन के हिसाब से शुल्क वसूला जाएगा। इसके लिए भू गर्भ जल विभाग ने तैयारियां शुरू कर दीं हैं।
ज्यादातर वाणिज्यिक एवं औद्योगिक इकाइयों द्वारा अपनी पानी की जरूरतें भू गर्भ जल से पूरी की जाती हैं। अब तक इसके लिए उन्हें अलग से कोई शुल्क अदा नहीं करना होता था, परंतु अब उन्हें पाताल से लिए जाने वाले इस पानी पर पैसा खर्च करना होगा। इसकी दरें निर्धारित कर दी गईं हैं। हालांकि, ये व्यवस्था जून 2020 से लागू हो गईं थीं। सरकार ने भूगर्भ जल को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करते हुए गजट प्रकाशित कर दिया था। लेकिन कोरोना काल होने की वजह से इस नई व्यवस्था क्रियान्वयन नहीं हो पाया। लेकिन अब इस नियम को धरातल पर लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। शुल्क प्रति घन मीटर प्रतिदिन के हिसाब से वसूला जाएगा। शुल्क की दरें क्षेत्र में भूगर्भ जल की उपलब्धता के हिसाब से चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटी गईं हैं। इन श्रेणियों में सुरक्षित, सेमी क्रिटिकल, क्रिटिकल व अति दोहित /नोटिफाइड शहरी क्षेत्र निर्धारित की गईं हैं। हालांकि, झांसी के अभी सभी क्षेत्र सुरक्षित श्रेणी में हैं। ऐसे में पानी के दोहन के हिसाब से 90 पैसे से 1.20 रुपये तक प्रतिदिन प्रति घन मीटर शुल्क अदा करना होगा। जबकि, अन्य श्रेणियों के क्षेत्र में ये 1.50 रुपये तक वसूला जाएगा।
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झांसी में यह होंगी दरें (प्रति घन मीटर प्रतिदिन)
500 घन मीटर प्रतिदिन - 90 पैसे।
500 से 1000 घन मीटर प्रतिदिन - 1 रुपये।
1000 से 5000 घन मीटर प्रतिदिन - 1.10 रुपये।
5000 घन मीटर से अधिक प्रतिदिन - 1.20 रुपये।
कराना होगा पंजीकरण
झांसी। वाणिज्यिक एवं औद्योगिक प्रतिष्ठानों को ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण शुल्क पांच हजार रुपये अदा करना होगा। इसके अलावा विभागीय अनापत्ति भी लेनी होगी। इसका शुल्क भी पांच हजार रुपये देना होगा। पंजीकरण का प्रति तीन वर्ष में नवीनीकरण कराना होगा।
ड्रिलिंग एजेंसियों को रखना होगा ब्योरा
झांसी। बोरिंग करने वाली ड्रिलिंग एजेंसियों को भी पंजीकरण करना होगा। इसके लिए उन्हें पांच हजार रुपये पंजीकरण शुल्क जमा करना होगा। हर तीन साल में पंजीकरण का नवीनीकरण होगा। इसके अलावा एजेंसियों को उन सभी लोगों का पूरा ब्योरा रखना होगा, जिनके यहां उन्होंने बोरिंग की है। सभी प्रकार के पंजीकरण विभाग की वेबसाइट ह्वश्चद्द2स्रशठ्ठद्यद्बठ्ठद्ग.द्बठ्ठ पर होंगे।
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वाणिज्यिक एवं औद्योगिक इकाइयों से जल की शुल्क वसूली को लेकर उद्योग विभाग से चर्चा हुई है। उद्योग बंधु की बैठक के माध्यम से उद्यमियों को इसकी जानकारी दी जाएगी। सभी को ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। चालान के माध्यम से सालाना शुल्क अदा करना होगा। - शशांक शेखर सिंह, सहायक अभियंता - भूगर्भ जल विभाग
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