फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

झांसी में बदइंतजामी कम नहीं, कभी भी हो सकता महाराष्ट्र सा हादसा

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। महाराष्ट्र के भंडारा जिला अस्पताल में शनिवार को आग लगने की घटना में दस नवजात बच्चों की मौत के मामले ने एक बार फिर अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। झांसी में संकरी गलियों में खुले कई अस्पतालों में बदइंतजामी है। इनके पास न तो आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम हैं और न ही आग बुझाने के लिए आने वाले फायर बिग्रेड की गाड़ियों के लिए सिट बैक।
विज्ञापन

झांसी में धड़ल्ले से निजी अस्पताल खुलते जा रहे हैं। मानकों को ताक पर रखकर इन्हें लाइसेंस जारी किया जा रहा है। कई अस्पताल तो बिना लाइसेंस के ही संचालित हो रहे हैं। छोटे-छोटे कमरों और संकरी गलियों में चलने वाले कई अस्पतालों में इंतजाम के नाम पर कुछ नहीं है। बिल्डिंग में ऊपर घर और नीचे नर्सिंगहोम चल रहे हैं। कई अस्पतालों में आग बुझाने के लिए जरूरी अग्निशमन यंत्र या तो नहीं है या फिर वो एक्सपायरी हो चुके हैं। इसके अलावा अस्पतालों के निर्माण के लिए चारों तरफ सिट बैक बनना जरूरी होता है, जिससे आग लगने की स्थिति पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंच आग पर काबू पा सके। मगर अधिकतर अस्पतालों में सिट बैक के लिए जगह ही नहीं छोड़ी गई है। ऐसे में झांसी में कभी भी महाराष्ट्र जैसा हादसा हो सकता है।
शासन ने दिए नोडल अधिकारी बनाने के निर्देश
महाराष्ट्र की हादसे से सबक लेते हुए शासन ने जिला स्तर पर दो नोडल अधिकारी बनाने के निर्देश दिए हैं। शनिवार को हुई वीडियो कांफ्रेंसिंग में अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य ने कहा कि महानगर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर एक-एक नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया जाए। नोडल अधिकारी ही फायर सेफ्टी से जुड़ी हकीकत पता करेंगे। कहीं भी कमी पाई जाती है तो कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन

जिला स्तर पर अस्पतालों में आग से सुरक्षा इंतजामों की जांच कराने के निर्देश दिए जाएंगे। कहीं भी कमी मिलती है तो कार्रवाई होगी। - डॉ. जगदीश गुप्ता, प्रभारी अपर निदेशक, स्वास्थ्य।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें