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Jhansi News: आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज में ही नहीं आयुर्वेदिक दवा, जो बचीं वो भी खत्म होने के कगार पर

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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज में एक माह से दवाओं की जबरदस्त कमी है। करीब 45 दवाएं तो पूरी तरह से खत्म हो चुकी हैं। जिसकी वजह से चिकित्सक रोगियों को बाहर की दवाएं लिखने को मजबूर हैं। वहीं, प्राचार्य का कहना है कि एक माह पहले दवाओं की डिमांड मुख्यालय भेज दी थी, जिसका इंतजार किया जा रहा है।



आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना 250 से ज्यादा रोगी उपचार के लिए आते हैं और तीन से चार भर्ती होते हैं। रोगियों को कॉलेज की तरफ से दवाएं भी दी जाती हैं, जिस पर अक्सर संकट बना रहता है। आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि सात माह पहले 20 लाख रुपये की दवाएं मेडिकल कॉलेज को मिली थीं, जिनमें विभिन्न रोगों की करीब 70 दवाएं थीं। इनमें से 45 दवाएं पूरी तरह से खत्म हो गई हैं। जो दवाएं बची हुई हैं, वह भी खत्म होने के कगार पर हैं। ऐसे में उपचार के लिए आने वाले रोगियों को दवाएं बाजार से खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि बाजार की दवाएं लिखना मजबूरी हैं क्योंकि कॉलेज में दवाएं नहीं हैंं।
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0- ये प्रमुख दवाएं हो चुकी हैं खत्म



योगराज गुग्गुल, पंचगुण तेल, महानारायण तेल, सिंहनांद गुग्गुल, कंकायन वटी, अर्शशोधिन वटी, अभयारिष्ट, अशोकारिस्ट, दशमूलारिस्ट, स्फाटिक भस्म, निवादीचूर्ण, त्रिफला चूर्ण, हरितकी चूर्ण, अविवंत्तिकण चूर्ण आदि।
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0- वर्जन



एक माह पहले खत्म हो चुकी 45 दवाओं की डिमांड मुख्यालय भेजी थी, जो अभी तक नहीं आई हैं। रोगियों को मजबूरन बाजार की दवाएं लिखनी पड़ रही हैं। जल्द दवाओं के आने की उम्मीद है। - प्रो. रामकृष्ण राठौर, प्राचार्य आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज
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