सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को कोविड अस्पताल में भर्ती मरीज भूख और प्यास से बिलबिला रहे हैं। यहां तक कि वह परेशान होकर आत्महत्या तक की धमकी दे रहे हैं। तमाम मरीज तो अस्पताल के गेट पर आकर पत्रकारों को अपनी समस्याएं बता रहे हैं। रविवार को दोपहर एक बजे तक खाना न मिलने पर मरीजों ने हंगामा भी किया। इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन उसकी समस्या हल करने के लिए तैयार नहीं है।
शनिवार को नोडल अधिकारी प्रमुख सचिव सुरेश चंद्रा भी सीएचसी गए थे। वे अस्पताल के गेट पर खड़े होकर डॉक्टरों और स्टाफ से व्यवस्था सही करने के बात कहकर चले गए थे। सीएमओ डॉ. गजेंद्र कुमार निगम के अस्पताल पहुंचने पर मरीजों ने उनसे भी शिकायत की। इस संबंध में पत्रकारों से उनसे जानकारी चाही तो कहा कि कुछ समस्याएं हैं उनको ठीक किया जा रहा है।
जिला प्रशासन कितने भी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे करे लेकिन जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से पंगु हो चुकी है। जिले में कोरोना के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सीएचसी को भी कोविड 19 एलवन में बदला गया है। इसलिए जिला मुख्यालय के आसपास से आने वाले कोरोना मरीजों को सीएचसी बरुआसागर में भी भर्ती किया गया है। इस समय अस्पताल में कोरोना के 75 मरीज भर्ती हैं। इतने मरीज होने के बाद भी न तो वार्ड में सफाई की अच्छी व्यवस्था है और न ही मरीजों के लिए पानी के पानी की।
रविवार को एक मरीज तो अस्पताल की छत पर चढ़ गया। उसने वहां से वीडियो बनाकर कहा कि अस्पताल में खाना और पानी तक नहीं मिल रहा है। इससे परेशान होकर उसने कूदकर जान देने तक की धमकी दे दी। इसके अलावा एक मरीज ने तो वार्ड के अंदर से ही वीडियो बनाकर वहां की अव्यवस्था दिखाईं। उसका कहना है कि यहां पर बाथरूम तक की सफाई नहीं की गई है। जो पानी के लिए पानी आ रहा है उसमें कीड़े हैं। सुबह न तो चाय और नाश्ता तक नहीं दिया जा रहा है। दो बजे के बाद खाना मिलता है। रविवार को दोपहर एक बजे तक खाना नहीं मिला। इस पर मरीजों ने हंगामा शुरू कर दिया।
हंगामे की जानकारी मिलने पर पत्रकार वहां पहुंचे तो कई मरीज बाहर निकल आए। मरीजों ने पत्रकारों को बताया कि अस्पताल में न तो पानी मिल रहा है और न ही खाना। सफाई व्यवस्था भी नहीं है। मरीजों को खाना समय से नहीं दिया जा रहा है। साथ ही घटिया भोजन दिया जा रहा है। उसने बताया कि हम लोग कोरोना से मरे या न मरे यहां व्याप्त अवस्थाएं ही उन लोगों को मार डालेंगी। मरीजों ने बताया कि बिजली जाने के बाद जनरेटर तक नहीं चलाया जाता है। ऊपर के वार्ड में पंखे भी ठीक से नहीं चल रहे हैं। इन्हीं सब अव्यवस्थाओं के चलते बृहस्पतिवार को अस्पताल में पानी न मिलने पर एक मरीज बाहर निकलकर बस स्टैंड पर दुकान से पानी की बोतल खरीदने पहुंच गया था। वहीं शनिवार को भी खाना, नाश्ता न मिलने पर मरीजों ने हंगामा किया था।
अव्यवस्था से परेशान दो मरीजों ने तो अपना ट्रांसफर यहां से करवा लिया। हंगामे की जानकारी पर सीएमओ भी अस्पताल पहुंचे। उनसे भी मरीजों ने तमाम शिकायतें कीं। वह भी व्यवस्था करने का आश्वासन देकर चले गए। इस बारे में सीएमओ से पत्रकारों ने पूछा तो उन्होंने कहा कि छोटा मोटा मामला है। जो समस्याएं आ रही हैं उनको ठीक किया जाएगा।