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ऑटिज्म डे : बच्चे को अकेलापन पसंद तो डॉक्टर को दिखाएं

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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। यदि आपका बच्चा अलग तरह का व्यवहार करता है, एक ही बात को बार-बार दोहराता है। अकेले खेलना पसंद है और दूसरों से बात नहीं करता है तो नजरअंदाज न करें। यह ऑटिज्म बीमारी के लक्षण हैं और डॉक्टर से परामर्श करें। यह मानसिक बीमारी है।



मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि उनके पास हर माह एक बच्चा ऑटिज्म से पीड़ित आता है। जागरुकता न होने की वजह से माता-पिता को शुरुआत में पता नहीं चलता है। जब तक माता-पिता को पता चलता है, बीमारी बढ़ जाती है। बच्चे का व्यवहार एकदम बदल जाता है। ऑटिज्म पीड़ित बच्चे आंख से आंख मिलाने से बचते हैं। इस बीमारी का अभी तक ठोस उपचार नहीं है मगर दो साल के अंदर पहचान होने पर बच्चे के व्यवहार में काफी सुधार किया जा सकता है। ऑटिज्म बीमारी की वजह से बच्चे का मानसिक विकास नहीं हो पाता है।
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ऑटिज्म के संकेत एवं लक्षण



एक साल का होने से पहले ही बच्चे में ऑटिज्म के संकेत मिलने शुरू हो जाते हैं। स्पष्ट संकेत तब मिलते हैं जब बच्चा दो या तीन साल का हो जाता है। यह बीमारी बच्चे के सोशल स्किल्स, कम्युनिकेशन स्किल्स और व्यवहार को प्रभावित करता है।



कम्युनिकेशन स्किल्स : बच्चे का देरी से बोलना-सीखना, किसी शब्द या वाक्य को बार-बार दोहराना, सवालों के जवाब गलत देना, दूसरों की बात को दोहराना, गुड बॉय या हाथ हिलाने जैसी कोई भी प्रतिक्रिया नहीं देना है।



सोशल स्किल्स : अपनी चीजों को दूसरों से शेयर नहीं करना, चेहरे पर अजीब-ओ-गरीब हाव भाव दिखाना अथवा अपनी भावना को माता-पिता तक को नहीं बता पाना है।



व्यवहार : खिलौना या चीजों को काफी संभालकर रखना, बार-बार एक ही काम करना, एक ही चीज या खिलौने से खेलना, गुस्सा दिखाना, खुद को नुकसान पहुंचाना, समय पर न रोना और न खाने का सही समय होना।
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क्या होता है ऑटिज्म

ऑटिज्म मानसिक विकास का असंतुलन है। इससे पीड़ित बच्चा 18 माह का होने के बाद भी स्पष्ट शब्द नहीं बोलता है। रुचि के बारे में पता चलता है और न कोई प्रतिक्रिया देता है।
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