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बल्लियों के सहारे खड़े हैं आसरा आवास, हर वक्त डरे रहते हैं 111 परिवार

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झांसी। महानगर के लहर गिर्द इलाके में 639.32 करोड़ रुपये की लागत से गरीबों के लिए बनाए गए आसरा आवास बदहाल स्थिति में हैं। आवासों का आलम यह है कि अधिकतर का बाहरी व आंतरिक प्लास्टर झड़ने लगा है। कमजोर बालकनी गिर न जाए इसके लिए लोगों ने बल्लियां लगा रखी हैं। मकान जगह जगह से चटक गए हैं। यहां रहने वाले परिवार कई बार अपना दुखड़ा अफसरों के सामने रो चुके लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
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शहर के गरीबों को खुद का आशियाना मुहैया करने के लिए सरकार द्वारा आसरा आवास बनाए गए थे। लहर गिर्द में 120 आवासों का निर्माण सीएनडीएस ने किया था। वर्ष 2015-16 में निर्माण कार्य को शुरू किया गया था। सीएनडीएस द्वारा वर्ष 2019-20 में आवासों का निर्माण पूरा कर नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) को सौंप दिया था। डूडा द्वारा जरूरतमंदों को आवासों का आवंटन शुरू कर दिया था। आवंटन होते ही लोगों ने रहना शुरू किया तो अधिकतर आवासों के छज्जे नीचे की ओर झुकने लगे। वहीं कई आवासों के छज्जे गिर भी गए। यहां रहने वाले लोगों को हर वक्त हादसे का भय बना रहता है।
इस संबंध में जिला परियोजना अधिकारी तेज सिंह ने बताया कि आसरा आवास एरच में भी हैं जिनकी जांच के लिए नगर आयुक्त की अध्यक्षता में छह सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। रिपोर्ट के आधार पर ही लहर गिर्द के आवासों का निर्णय होगा।
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अधिकतर आवास जर्जर स्थिति में हो गए हैं। कई बार अधिकारियों से शिकायतें की गई है। लेकिन कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है।
कुसुम, स्थानीय नागरिक
अधिकांश आवासों की दीवारों का प्लास्टर जगह-जगह से झड़ रहा है। बारिश में कमरे के माध्यम से घरों के भीतर पानी आ जाता है।
मुन्ना, स्थानीय नागरिक
गरीबों के लिए बनाए गए सभी आवास काफी जर्जर हालत में हैं। इमारत की छतें चटक रहीं हैं। जिससे हर समय हादसे का भय बना रहता है।
क्रांति रायकवार, स्थानीय नागरिक
अधिकतर मकानों के छज्जे नीचे की ओर झुक गए हैं। जिसे बल्लियों और डंडों से रोक रखा है। जो किसी भी समय जमीदोज हो सकते हैं।
सावित्री, स्थानीय नागरिक
ऊपर का मकान है लेकिन बालकनी में आने पर काफी डर लगता है। बच्चों को भी घरों में कैद कर रखना पड़ता है। शिकायतें की गई हैं, कोई सुनवाई नहीं हुई।
राखी, स्थानीय नागरिक
कई मकानों की बालकनी गिर चुकी है। गनीमत रहीं की कोई हादसे का शिकार नहीं हो सका है। जिससे बालकनी में जाने पर काफी डर लगता है।
डॉली, स्थानीय नागरिक
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