झांसी। कोरोना संक्रमण के रिश्तों में भी दूरी बना दी है। संक्रमण के दौर में हो रही मौत के बाद लोग शवयात्रा और अंतिम संस्कार में भाग लेने से बच रहे हैं। महानगर में रविवार को मुस्लिम युवकों ने मानवता की मिसाल पेश की। सामान्य बीमारी से युवक की मौत के बाद अंतिम संस्कार के लिए अपनों ने परिवार का साथ छोड़ दिया, तो मुस्लिम युवाओं ने आगे बढ़कर अर्थी को कंधा देकर सारी क्रियाएं पूरी कराईं। मुस्लिम युवकों की पहल की लोगों ने सराहना की।
कटवर की कलारी के रहने वाले हरी प्रकाश सैनी के दो पुत्र में सें बड़े पुत्र भानु प्रकाश सैनी (40) दिमागी बीमारी के चलते ग्वालियर में ससुराल में रहकर अपना इलाज करा रहे थे। इलाज के दौरान ही शनिवार को उनकी मौत हो गई। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए झांसी स्थित पुश्तैनी घर लाया गया। जहां पर परिजनों द्वारा सभी रिश्तेदारों को सूचित किया गया। लेकिन देर रात तक कोई भी रिश्तेदार नही पहुंचा। यह देकर परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए चार आदमियों की चिंता सताने लगी। अंतिम संस्कार के लिए भानु के पिता हरी प्रकाश, मृतक की बेटी मुस्कान और मासूमा ने आस-पड़ोस के लोगों से मदद की गुहार लगाई और दिमागी बीमारी से मौत होने की जानकारी भी दी, लेकिन कोरोना के खौफ के चलते कोई भी आगे नहीं आया। जब यह जानकारी मोहल्ले के मुस्लिम युवकों को हुई थी तो युवकों ने भानु के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को ढ़ांढस बंधाया और क्रियाक्रम की तैयारियों में जुट गए। देर रात उन्नाव गेट स्थित मुक्तिधाम में हिंदू रीति रिवाज से भानू का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार करने वाले वालों में गोरे, आलिम, फईम, शानू, सगीर, हलीम, नासिर, कल्लू भईया, बाबू के साथ कई मुस्लिम युवक मौजूद रहे।
मृतक के पिता हरी प्रकाश ने बताया कि बेटे के अंतिम संस्कार के लिए चार आदमी भी नहीं जुट पा रहे थे। इलाके के मुस्लिम युवकों ने ही बेटे की अर्थी को कंधा देकर मदद की है। जिससे बेटे के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार हो सका है।