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अपराजिता : गर्भ से एक हजार दिन होते हैं शिशु के लिए अहम

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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। गर्भ में आने के दिन से एक हजार दिन शिशु के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। मां का मन-मतिष्क व स्वास्थ्य अच्छा होगा तो बच्चा तंदुरुस्त रहेगा। देश में अभी भी मातृ-शिशु मृत्युदर दहाई में है, जो चिंताजनक है। महिलाएं सबसे ज्यादा एनीमिया, मोटापा और डायबिटीज की चपेट में आ रही हैं, इसकी वजह खान-पान, अनियमित दिनचर्या आदि है। यह बात आर्य कन्या महाविद्यालय में अपराजिता के तहत सोमवार को हुए कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. हेमा जे. शोभने और बाल रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. ओमशंकर चौरसिया ने कही।

विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम स्वस्थ शुरुआत, आशापूर्ण भविष्य है कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप जलाकर किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. शारदा सिंह ने किया। मुख्य अतिथि डॉ. शोभने ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सबको अपने जीवन की कहानी लिखनी है, जिसमें स्वयं को नायक बनाएं। मन-मस्तिष्क को सकारात्मक दिशा में लगाने के लिए स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब स्वास्थ्य अच्छा नहीं होता है, तो तमाम घरेलू तनाव घेर लेते हैं। मेडिकल कॉलेज में आने वाली अधिकांश महिलाएं एनीमिया (रक्त की अल्पता), मोटापा, डायबिटीज से पीड़ित होती हैं। चूंकि महिला परिवार की धुरी होती है, इसलिए बीमार होने का असर पूरे परिवार पर पड़ता है।
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विशिष्ट अतिथि डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने कहा कि अनियमित दिनचर्या और अव्यवस्थित खान-पान की वजह से गर्भ में पल रहे बच्चे पर असर पड़ता है, इसलिए पौष्टिक भोजन ही खाना चाहिए। उन्होंने बताया कि देश में अभी भी मातृ-शिशु मृत्यु दर का आंकड़ा दहाई के अंक पर है, जो चिंता का कारण है। इस आंकड़े को कम करने के लिए सरकार की कई योजनाएं चल रही हैं। हर सरकारी अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए बेहतर उपचार और दवा की व्यवस्था है। अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. अलका नायक ने कहा अमर उजाला के इस कार्यक्रम से छात्राओं को काफी अहम जानकारी मिली है। कार्यक्रम का संचालन नंदिता सिंह ने किया।

0- मासिक धर्म के दौरान दर्द है तो घबराएं नहीं



संवाद के दौरान अधिकांश छात्राओं ने मासिक धर्म के दौरान दर्द की शिकायत की। डॉ. हेमा जे. शोभने ने कहा कि इस समस्या से ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। यदि असहनीय दर्द होता है, तो डॉक्टर से परामर्श लें। कुछ छात्राओं ने मासिक चक्र गड़बड़ाने की शिकायत की। इस पर नियमित सैर करने, सुपाच्य भोजन करने और फास्ट फूड से परहेज करने की सलाह दी।
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0- स्वास्थ्य शिविर में छात्राओं की हुई जांच, दवा दी



मेडिकल कॉलेज की डॉ. सोनाली व डॉ. सुरभि ने कार्यक्रम के बाद 60 छात्राओं के स्वास्थ्य की जांच की। अधिकांश छात्राओं में एनीमिया और थायराइड के लक्षण मिले। डॉक्टरों ने खान-पान में सुधार करने की सलाह देते हुए दवाएं वितरित कीं। इस दौरान काउंसलर संजना ने छात्राओं को कई अहम टिप्स भी दिए।
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