झांसी। पूरे बुंदेलखंड में सिर्फ झांसी में ही पूरे पांच साल तक जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी समाजवादी पार्टी बचाने में कामयाब रही। जबकि सात जिलों में से पांच में कहीं, अविश्वास प्रस्ताव के जरिए तो कहीं, कुर्सी बचाने की खातिर जिला पंचायत अध्यक्ष ने पार्टी ही बदल ली।
जनपद में राजनीति का रास्ता जिला पंचायत से होकर गुजरता है। ऐसे में विधायक से लेकर सांसद तक यहां अपनी दखल बनाए रखने की जी-तोड़ कोशिश करते हैं। मौजूदा जिला पंचायत का गठन वर्ष 2015 में हुआ। सूबे में सपा की सरकार होने से बुंदेलखंड की सभी जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर सपाई परचम लहरा उठा। लेकिन वर्ष 2017 में जैसे ही सरकार बदली सभी अध्यक्षों की कुर्सियां डगमगाने लगीं। महज एक साल के भीतर ललितपुर में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सरिता यादव की जगह जयश्री खटीक अध्यक्ष बनीं। बांदा में भी अविश्वास प्रस्ताव से निर्भया पटेल की जगह सरिता द्विवेदी अध्यक्ष बनीं। हमीरपुर में वंदना यादव को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाकर जयवंती राजपूत को अध्यक्ष बनाया गया। हालांकि कुछ दिनों पहले वंदना यादव को कोर्ट ने फिर से अध्यक्षी पद पर बहाल किया। जालौन में फरा नाज की मौत के बाद सुमन निरंजन अध्यक्ष बनीं। इसी तरह महोबा में सपा के रमेश यादव को जब अपनी कुर्सी पर खतरा दिखा तो उन्होंने भाजपा में जाकर अपनी कुर्सी बचाई। इन सबके बीच झांसी में प्रतिमा यादव ही पूरे पांच साल तक अपनी कुर्सी बचाए रखने में कामयाब रहीं। इसमें भी खास बात यह रही कि इनके खिलाफ कोई अविश्वास प्रस्ताव तक पेश नहीं किया जा सका।
जिला पंचायत का आज खत्म हो जाएगा कार्यकाल, जिलाधिकारी बनाए जाएंगे प्रशासक
झांसी। जिला पंचायत अध्यक्ष समेत सदस्यों का कार्यकाल बुधवार आधी रात को खत्म हो जाएगा। जिपं अध्यक्ष की जगह जिलाधिकारी को प्रशासक बनाने की तैयारी है। कार्यकाल खत्म होने की उल्टी गिनती शुरू होते ही जिला पंचायत कार्यालय में तेजी से कामकाज निपटाए जा रहे। भुगतान संबंधी तमाम फाइलें निपटाई जा रहीं। करीब डेढ़ करोड़ रुपये के भुगतान आज निपटाए गए। तमाम ऐसी फाइलों की भी पड़ताल हुई, जो पिछले कई वर्षो से लापता थी। जिपं सदस्य भी कार्यकाल के आखिरी दिन निर्णय कराने को लामबंदी करते दिखे। जनपद में जिपं अध्यक्ष को मिलाकर कुल 25 सदस्य निर्वाचित हुए थे। इनमें भाजपा के चार, बसपा के चार, सपा के 16 एवं एक निर्दलीय शामिल है। उधर, कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रशासक के तौर पर जिलाधिकारी की तैनाती होनी है लेकिन, इस संबंध में शासनादेश नहीं आया। इसको लेकर भी कश्मकश चल रही है।
जिले में बारहवीं अध्यक्ष रहीं प्रतिमा, चार बार डीएम बन चुके प्रशासक
झांसी। मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिमा सुजीत यादव ने बारहवीं अध्यक्ष के तौर पर काम किया। जबकि चार बार जिलाधिकारी बतौर प्रशासक यहां की कमान संभाल चुके हैं। वर्ष 1995 में गठन के बाद से बलवंत सिंह, राकेश पाल, दयावती पाल, डॉ. मनोज कुशवाहा, वंदना पाठक, मीरा विष्णु राय अब तक जिपं अध्यक्ष बन चुकी हैं।
ठंडे बस्ते में सीधे चुनाव का प्रस्ताव
जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव सदस्यों से न कराकर सीधे मतदाताओं से कराने को लेकर सरकार ने कवायद शुरू की थी। लेकिन बाद में राजनीतिक वजहों से इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सरकार को सीधे मतदाताओं से चुनाव कराने का नुकसान भी समझ में आ गया। इसे देखते हुए अब सरकार भी बस पर बात नहीं कर रही है।