झांसी। केंद्र से कांग्रेस की सरकार गई और 2014 में भाजपा की आई और अब नई सरकार के गठन के लिए चुनावी प्रक्रिया जारी है। झांसी में हवाई अड्डे की स्थापना को लेकर दोनों सरकारों के नुमाइंदों की ओर से बड़े-बड़े वादे और दावे किए गए, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है। हवाई अड्डा हवा में ही है, धरातल पर इसके साकार रूप लेने की निकट भविष्य में संभावना भी नजर नहीं आ रही हैं।
भरपूर संभावनाएं होने के बाद भी बुंदेलखंड का पर्यटन व औद्योगिक विकास नहीं हो पाया है। यहां से होकर पर्यटक मध्य प्रदेश की ओर रवाना हो जाते हैं, जबकि देश के बड़े उद्यमियों का इस भूभाग की ओर रुख नहीं है। इसकी एक बड़ी वजह हवाई अड्डे की कमी को माना जाता है। दशकों से क्षेत्र के लोग हवाई अड्डे की स्थापना का इंतजार कर रहे हैं। इसे सरकार में बैठे लोग हवा भी देते रहते हैं।
खासतौर पर पिछले छह सालों के दरम्यान हवाई अड्डा खूब गरमाया रहा। केंद्र की यूपीए सरकार के आखिरी दिनों में इसमें तेजी देखने को मिली थी। तत्कालीन स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन के प्रयासों से एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और प्रदेश के नागरिक उड्डयन विभाग की टीम झांसी आई थी। दोनों टीमों ने ग्वालियर रोड स्थित सेना की हवाई पट्टी और ग्राम सफा में हवाई अड्डे के लिए प्रस्तावित जमीनों का स्थलीय और हवाई सर्वेक्षण किया था। इसके बाद टीमों का आनाजाना जारी रहा। यहां से हवाई अड्डे का खाका तैयार कर भेज भी दिया गया था। माना जा रहा था कि अब जल्द ही हवाई अड्डे की निर्माण की दिशा में काम शुरू हो जाएगा, लेकिन यूपीए सरकार चली गई, हवाई अड्डा हवा में ही लटका रहा।
2014 में केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का गठन हुआ। स्थानीय सांसद उमा भारती को केंद्र में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। उनकी ओर से भी हवाई अड्डे को लेकर बातें बहुत की गईं। यहां तक कि आठ महीने पहले उन्होंने महज 90 दिन में झांसी से हवाई जहाजों के उड़ान भरने का सपना भी दिखाया, लेकिन वे भी इसे साकार नहीं कर पाईं। टीमें आईं और गईं, हवाई जहाज नहीं उड़ पाया।