झांसी। हर चुनाव में महानगर की अतिक्रमण की समस्या मुद्दा बनती है। नेताओं की ओर से भी चुनाव जीतने के बाद कारगर कार्रवाई और समस्या का स्थायी हल कराने का वादा भी किया जाता है लेकिन चुनाव बाद इसे भुला दिया जाता है। हालांकि, नगर निगम कभी-कभी अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाता है लेकिन अफसरों के पीठ फेरते ही हालात जस की तस हो जाते हैं। मौजूदा लोकसभा चुनाव में अब फिर सभी राजनीतिक दलों के महारथी ताल ठोक रहे हैं। सभी अतिक्रमण से होने वाले जाम को दूर और पार्किंग की व्यवस्था करने का वादा कर रहे हैं।
पिछले आठ सालों में अतिक्रमण शहर की लाइलाज बीमारी बन गया है। इस समस्या से लोगों को छुटकारा दिलाने के लिए ठोस प्रयास नहीं हुए। स्थिति यह है कि नगर निगम की टीम हर बार रोस्टर बनाकर अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाती रही लेकिन कुछ दिन बाद ही स्थिति जस की तस हो गई। हर बाजार अतिक्रमण की चपेट हैं। पार्किंग न होने से समस्या दोगुनी बनी हुई है। कारोबारियों द्वारा जहां बाजारों में दुकानों का सामान सड़क पर रख लिया जाता है, वहीं हाथ ठेला और खोमचे वाले हर चौराहे पर अपना कब्जा किए हुए हैं। कारोबारियों और ग्राहकों का कहना है कि अभी तक जनप्रतिनिधियों ने अतिक्रमण की समस्या को खत्म करने के लिए कोई पहल नहीं की है। यही वजह है कि झांसी अतिक्रमण मुक्त होने की जगह इसमें और जकड़ता जा रहा है। कमोवेश ऐसे ही हालात ललितपुर में भी हैं। अतिक्रमण और पार्किंग समस्या से परेशान लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए प्रत्याशी इसे चुनाव का मुद्दा बना रहे हैं।
अतिक्रमण प्वाइंट: बड़ा बाजार, गंधीगर का टपरा, टकसाल, गांधी रोड, सुभाषगंज, रानीमहल, कचहरी चौराहा, मानिक चौक, न्यू रोड, सीपरी ओवरब्रिज, बस स्टैंड, मेडिकल कॉलेज के सामने, रेलवे स्टेशन के बाहर, नदंनपुरा खातीबाबा मार्ग पर, गरिया फाटक से प्रेमनगर थाने तक।
कुछ सालों में अतिक्रमण दोगुना हो गया है। खासकर प्रमुख बाजारों में जहां सड़कें छोटी हैं, वहां के दुकानदारों द्वारा बाहर सामान रखने से ज्यादा परेशानी बढ़ती है। - अफरोज खान, व्यापारी।
अतिक्रमण हटाने में कभी व्यापारी नेता और जनप्रतिनिधियों का साथ नहीं मिलता। कोई बुराई नहीं लेना चाहता। उनका संरक्षण अतिक्रमण दूर करने में ज्यादा बाधा बनता है। - अनय कुमार, कारोबारी।
प्रमुख स्थानों पर मार्केट के अंदर बाजार खुलते जा रहे हैं। गलियों में भी दुकानें खुल गई हैं। जबकि, बाजारों में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। अतिक्रमण का सामना करना तो मजबूरी है। - बबलू राय, व्यापारी।
मैंने बाजार में गाड़ी ले जाना ही बंद कर दिया है क्योंकि अक्सर जाम लगने से पैदल निकलना तक मुश्किल होता है। जनप्रतिनिधियों को इस समस्या का स्थायी हल निकालना चाहिए। - राहुल गोस्वामी, पुजारी।