रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि तकनीक विकास की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। विश्वविद्यालय में जल्द ही आधुनिक उपकरणों से लैस सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी लैब शुरू हो जाएगी। इसके बाद छात्र-छात्राएं यहां पर शोध कार्य कर सकेंगे। इसके अलावा विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को मॉडल विलेज तैयार करने की दिशा में प्रशिक्षित कर रहा है। ताकि, भविष्य में इसका फायदा छात्र-छात्राओं के अलावा किसानों को भी हो।
मौजूदा समय में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर पर बीएससी एग्रीकल्चर, बीएससी हॉर्टीकल्चर, बीएससी फॉरेस्ट्री और परास्नातक स्तर पर एमएससी एग्रोफॉरेस्टी, एमएससी प्लांट पैथोलॉजी, एमएससी जेनेटिक्स एंड प्लांट फीडिंग परास्नातक के कोर्स चल रहे हैं। इसी सत्र से परास्नातक स्तर पर सॉयल साइंस, इंटेमोलॉजी, वेजिटेबल साइंस और फ्रूट साइंस, सिल्विकल्चर एंड एग्रोफॉरेस्ट्री कोर्स शुरू होने हैं।विश्वविद्यालय में चल रहे नए और आधुनिक कोर्स शुरू होने का सीधा फायदा छात्र-छात्राओं को मिल रहा है।
विश्वविद्यालय अब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध और कृषि तकनीक विकास को बढ़ावा दे रहा है। इसके लिए सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी लैब बनकर तैयार हो गई है। छह महीने में लैब शुरू हो जाएगी। लैब में आधुनिक उपकरण होंगे। यहां पर भूजल, मिट्टी आदि की गुणवत्ता की जांच की जा सकेगी। पोषक तत्व समेत जो कमियां मिलेंगी, उनको दूर किया जा सकेगा।
वहीं, विश्वविद्यालय ने केंद्र सरकार के अलावा फंडिंग एजेंसी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवाचार के लिए प्रस्ताव भेजे हैं। इनमें से कुछ को जल्द स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। वहीं, यूनिवर्सिटी छात्र-छात्राओं को जल प्रबंधन, बीज उत्पादन आदि सिखाकर मॉडल विलेज तैयार करने की दिशा में भी प्रशिक्षित कर रहा है।
उद्यमी तैयार करने के लिए कार्यक्रम शुरू
कृषि विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा के अलावा युवा उद्यमी तैयार करने के लिए कार्यक्रम भी शुरू कर दिया है। रूरल एंटरप्रेन्योर्स एंड एवेयरनेस डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत स्टूडेंट रेडी प्रोग्राम शुरू किया गया है। इसके तहत उद्यमी तैयार किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत बीज उत्पादन का प्रशिक्षण और पौध के प्रचार-प्रसार से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
बढ़ गईं कोर्सों की सीटें
कृषि विश्वविद्यालय में स्नातक कोर्सों की सीटें बढ़ गई हैं। अब बीएससी एग्रीकल्चर में 40 की जगह 60 और बीएससी हॉर्टीकल्चर और बीएससी फॉरेस्टी में 20-20 की जगह 30-30 सीटों पर छात्र-छात्राएं प्रवेश ले सकेंगे।
विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को शोध आधारित शिक्षा देने की योजना है। जब तक छात्र-छात्राएं प्रैक्टिकल नहीं करेंगे, तब तक सीख नहीं पाएंगे। इसके लिए सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी लैब मददगार साबित होगी, जो छह माह में शुरू हो जाएगी। वहीं, स्टूडेंट रेडी प्रोग्राम युवा उद्यमी तैयार करने में मददगार साबित हो रहा है। ऐसे में युवा जॉब सीकर (नौकरी खोजने वाले) की जगह जॉब प्रोवाइडर बनेंगे।
इसी सत्र से नए कोर्स शुरू होने से भी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा हासिल करने में काफी मदद मिलेगी। - डॉ. अरविंद कुमार, कुलपति, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय।