झांसी। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव डॉ. सुधांशु त्रिपाठी ने कहा कि केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में शोध कार्य बढ़ें और बुंदेलखंड की परिस्थिति के हिसाब से कम पाने में लहलहाने वाली फसल के बीज तैयार हों तभी इस संस्थान का उद्देश्य सफल हो पाएगा।
उन्होंने बताया कि नौ अगस्त 2009 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से उनके साथ झांसी के एक दल ने मुलाकात की थी। इसमें उन्होंने ही आईजीएफआरआई और एनआरसीएएफ को मिलकर एग्रीकल्चर और तकनीकी यूनिवर्सिटी की मांग की थी। यहीं से विश्वविद्यालय खुलने की परिकल्पना बनी। उन्होंने बताया कि आज विश्वविद्यालय बनकर तैयार हो गया है। शिक्षण कार्य भी शुरू हो गया है लेकिन इसका उद्देश्य तभी सफल होगा, जब यह किसानों के लिए लाभप्रद साबित होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की परिकल्पना ही इसलिए की गई थी कि यहां पर शोध कार्य बढ़ें। साथ ही, बुंदेलखंड की भौगोलिक परिस्थिति के मद्देनजर कम पानी वाली फसलों के बीज तैयार किए जाएं। ताकि, किसानों को लाभ हो सके।