झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय इसी साल से चार कोर्सों में पीएचडी शोधार्थी तैयार करेगा। ये कोर्स एग्रोनॉमी, जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग, प्लांट पैथोलॉजी, एग्रोफॉरेस्ट्री हैं। फैकल्टी की कमी पूरी हो जाने से विश्वविद्यालय ने इसकी तैयारी कर ली है।
कृषि विश्वविद्यालय में 2017 से पहले बैच का प्रवेश हो गया था। मौजूदा समय में यहां पर फल विज्ञान, सब्जी विज्ञान, प्लांट पैथोलॉजी, मृदा विज्ञान, कीट विज्ञान, कृषि वानिकी, कृषि विज्ञान, आनुवंशिक और पादप प्रजनन कोर्स चल रहे हैं। अब तक दो बैच पढ़ाई पूरी करके पासआउट हो चुके हैं। पांच साल बाद इस सत्र से विश्वविद्यालय पीएचडी शुरू करने जा रहा है। ऑल इंडिया एंट्रेंस एग्जामिनेशन के जरिए पीएचडी में प्रवेश मिलेगा। शिक्षकों की संख्या के आधार पर किसी में दो, किसी में तीन तो किसी कोर्स में पीएचडी की चार सीटें होंगी। चूंकि, विश्वविद्यालय की तरफ से ग्रासलैंड और काफरी से भी अनुबंध किया गया है। ऐसे में यहां के शिक्षक से लेकर संसाधन तक का सहयोग विश्वविद्यालय ले सकेगा। जबकि, फल विज्ञान, सब्जी विज्ञान, मृदा विज्ञान और कीट विज्ञान में फैकल्टी पर्याप्त न होने की वजह से पीएचडी शुरू होने में कुछ साल और लग सकते हैं।
छह महीने का होगा कोर्स वर्क
केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरविंद कुमार ने बताया कि पीएचडी के 25 क्रेडिट कोर्स वर्क और 75 क्रेडिट शोध कार्य करने पर मिलेंगे। शुरूआत में छह महीने का कोर्स वर्क होगा।