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झांसी के कोविड किट घपले के साक्ष्य तलाश रही एजेंसी

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झांसी। बहुचर्चित कोविड किट घोटाला घपलेबाजों के गले की फांस बन चुका है। एसआईटी के हाथ जो मूल्य सूची लगी है उसके आधार पर पूरी खरीद प्रक्रिया ही सवालों के दायरे में आ खड़ी हुई। कई जगह घटिया ऑक्सीमीटर खरीद लिए गए थे जो कुछ समय बाद ही खराब भी हो गए। कोविड किट के खराब उपकरणों को बदलने की कोशिश तक नहीं की गई। एसआईटी द्वारा की जा रही जांच में कइयों का फंसना तय माना जा रहा है। एसआईटी बारह बिंदुओं पर जांच कर रही है।
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कोरोना महामारी के बीच बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाकों में प्रवासी मजदूर आए। इसको देखते हुए प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों को ऑक्सीमीटर, इंफ्रारेड थर्मोमीटर जैसे उपकरणों की खरीद के निर्देश दिए। अधिकतम प्रवासी मजदूरों की वापसी मार्च से जून माह के बीच हुई लेकिन, इन उपकरण की खरीद ही जुलाई के दूसरे चरण में हुई। उपकरण जब खरीदे भी गए तब उनको मनमाने तरीके से बाजार मूल्य से करीब तीन- चार गुने दाम पर खरीद गया। जिस दाम पर यह उपकरण खरीदे गए वह सूची भी एसआईटी के पास पहुंच गई है। एसआईटी ने पूरा मामला खंगालना शुरू कर दिया है। खरीद प्रक्रिया से सीधे जुड़े अफसरों से एसआईटी ने जवाब तलब किया है। उसके सवाल अफसरों के पसीने छुड़ा रहे हैं। एसआईटी ने सबसे गंभीर सवाल
प्रोक्योरमेंट नार्मस में उनकी भूमिका को लेकर पूछा है। इस सवाल पर आला अफसरों तक पर भी शिकंजा कस सकता है। इसके साथ ही एसआईटी ने सीधे डीपीआरओ की भूमिका भी खरीद प्रक्रिया में स्पस्ट करने को कहा है। इसके अलावा उपकरणों की दर तय करने, ब्रांड नेम, उपकरणों की खरीद में कोई मेडिकल कारपोरेशन अथवा किसी विभाग के साथ पत्राचार करने के साथ ही प्रधानों को रेट को लेकर कोई निर्देश दिए जाने को को लेकर भी सवाल पूछे गए हैं। सूत्रों का कहना है कि सवालों के साथ ही उपकरणों की कीमत जस्टिफाई करने में बड़ी समस्या आ रही है। ऑनलाइन भुगतान होने के नाते कुल खरीद में अन्य उपकरण भी शामिल करके लागत कम करने की कोशिश की गई लेकिन, उसमें कामयाबी नहीं मिली। अभी अफसरों के बीच मंथन का दौर जारी है।
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