एक अक्तूबर से लागू होगी नई व्यवस्था, डाक विभाग के उप महानिदेशक ने जारी की अधिसूचना
डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते चलन के चलते विभाग ने लिया निर्णय, कम समय में पहुंचेगी डाक
संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। 171 साल पुरानी रजिस्टर्ड डाक सेवा का स्पीड पोस्ट में विलय किया जा रहा है। यह व्यवस्था एक अक्तूबर से लागू होगी।नई सेवा आधुनिक तकनीक और हवाई परिवहन के साथ तेज डिलीवरी भी सुनिश्चित करेगी। डाक विभाग के उप महानिदेशक दुष्यंत मुद्गल की ओर से जारी अधिसूचना में विलय संबंधी आदेश दिए गए हैं।
डाक विभाग की विशेष सेवा रजिस्ट्री की शुरुआत ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1854 में हुई थी। इसके तहत ग्राहकों को डिलीवरी के साक्ष्य और रिसीवर के हस्ताक्षर मिलते थे। इसका इस्तेमाल अधिकांशत: कोर्ट के सम्मन, कानूनी नोटिस और तलाक जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज भेजने के लिए किया जाता है। 1 अक्तूबर से यह सेवा स्पीड पोस्ट के साथ मिलकर एक नए अंदाज में सर्विस मुहैया कराएगी। हालांकि विभाग ने कहा है कि नाम में बदलाव होगा, लेकिन पुरानी सेवा भी ली जा सकती है। रजिस्टर्ड डाक का कम से कम शुल्क 26 रुपये है। स्पीड पोस्ट का कम से कम शुल्क 41 रुपये है। इस पर टैक्स भी लगेगा।
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स्पीड पोस्ट महंगी, लेकिन समय की होगी बचत
- नई व्यवस्था के बाद ग्राहकों को जेब ज्यादा ढीली करनी होगी, लेकिन आपको यह सेवा रजिस्टर्ड डाक के सापेक्ष कम समय में उपलब्ध होगी। रजिस्टर्ड डाक में देश के किसी भी कोने में चिट्ठी आदि पहुंचाने के लिए ग्राहक को 17 रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क और प्रति 20 ग्राम वजन के लिए पांच रुपये यानी 22 रुपये ही देने पड़ते थे, जबकि स्पीड पोस्ट में 200 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 20 से लेकर 50 ग्राम तक के लिए 41.30 रुपये शुल्क देना पड़ेगा।
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क्या है दोनों ही डाक सेवाओं में अंतर
- रजिस्टर्ड डाक : प्राप्तकर्ता के सत्यापन के साथ सुरक्षित डिलीवरी। स्पीड पोस्ट की तुलना में धीमी। तुलनात्मक रूप से कम शुल्क। ट्रैकिंग की सुविधा।
- स्पीड पोस्ट : तेज और समयबद्ध डिलीवरी। दिए गए पते पर कोई भी व्यक्ति इसको प्राप्त कर सकता है। शुल्क थोड़ा ज्यादा। ट्रैकिंग रियल टाइम के साथ।
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वर्जन -
- रजिस्टर्ड डाक सेवा बंद नहीं की गई है, बल्कि स्पीड पोस्ट सेवा में विलय की गई है। एक अक्तूबर से डाकखानों में स्पीड पोस्ट सेवा ही उपलब्ध रहेगी। इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है।
- वरुण मिश्रा, प्रवर अधीक्षक, डाक विभाग, झांसी