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आम बजट को किसी ने नाकाफी बताया, किसी ने संतोष जताया

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झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमणकाल से गुजरे साल के बाद सोमवार को संसद में वित्तमंत्री द्वारा पेश किए गए देश के आम बजट पर सभी की निगाहें लगी रहीं। बेरोजगार युवा बजट में रोजगार के अवसर तलाशते रहे, कारोबारी करों को कम करने की राह तकते रहे। महिलाओं को रसोई की महंगाई कम होने की उम्मीद रही, तो किसान आमदनी बढ़ने का जरिया तलाशते रहे। सभी के लिए देश का ये बजट खास रहा। बजट पेश होने के बाद लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आई।
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पिछले साल सरकार द्वारा बजट पेश किए जाने के कुछ समय बाद ही कोरोना काल शुरू हो गया था। लोगों को लॉकडाउन जैसी त्रासदियों का सामना करना पड़ा था। कारोबार और रोजगार बुरी तरह से प्रभावित हो गए थे। समाज का हर वर्ग इस महामारी से प्रभावित हुआ था। अब तक लोग इससे पूरी तरह से उबर नहीं पाए हैं। कारोबार की गति भी मंद पड़ी हुई है, तो रोजगार पर भी संकटों के बादल मंडरा रहे हैं। इन परिस्थितियों में वित्त वर्ष 2021-22 का बजट सभी के लिए खास था। इसी का नतीजा रहा है कि लोग सुबह से ही बजट पर टकटकी लगाए बैठे रहे। सभी वर्ग के लोग अपने हित के प्रावधान बजट में तलाशते रहे। सभी दिन भर टीवी पर नजर जमाए रहे। ऑनलाइन बजट के प्रावधान देखते रहे। बजट के प्रावधानों को सोशल मीडिया के जरिये आपस में शेयर भी खूब किया गया।
देश भर में पंद्रह हजार आदर्श स्कूल खोले जाने, उच्च शिक्षा आयोग गठित किए जाने व बुंदेलखंड समेत देश के आदिवासी इलाकों में स्कूल खोले जाने की घोषणा शिक्षा से जुड़े क्षेत्र के लोगों को रास आईं। इसमें उन्हें रोजगार की संभावनाएं भी नजर आईं। एमएमएमई के लिए 15,750 करोड़ रुपये का प्रावधान किए जाने से बेरोजगारों को स्वरोजगार की राह आसान होने की उम्मीद जगी। देश में सात हजार मंडियां बनाने का प्रावधान किसानों को रास आया। इससे किसान पांच किलोमीटर के दायरे में अपनी फसल बेच सकेंगे। बजट पेश किए जाने के बाद सभी वर्गों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आई। किसी ने बजट के प्रावधानों को नाकाफी बताया, तो कुछ संतोषजनक स्थिति में नजर आए।
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