झांसी। खाने की थाली लोगों के घर का बजट बिगाड़ रही है। जबरदस्त मुनाफाखोरी के कारण आलू, प्याज दोगुने दामों पर बिक रहा है। महंगाई से लड़ाई में प्रशासन पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। जनता की जेब ढीली हो रही है और अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं।
झांसी की सब्जी मंडी में रविवार को प्याज 22 से 35 रुपये किलो में बिका। जबकि, पुराना आलू 30-35 रुपये किलो और नया आलू 38-40 रुपये किलो में लोगों ने खरीदा। वहीं, मंडी परिसर के बाहर ठेले, फुटकर दुकानदारों ने प्याज 50 से 60, पुराना आलू 45 और नया 60 रुपये किलो में बेचा। इससे स्पष्ट है कि मंडी से चंद किलोमीटर दूर ही प्याज के दाम लगभग दोगुने होकर 30 रुपये बढ़ गए।
वहीं, पुराना आलू 10 से 15 और नया आलू 20 से 22 रुपये महंगा बिका। आलू-प्याज तो लोग लगभग रोजाना खाते हैं, ऐसे में थाली की कीमतें अब लोगों का बजट बिगाड़ने लगी हैं। वहीं, जिला प्रशासन के अधिकारी हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं। मुनाफाखोरों के खिलाफ अभियान नहीं चलाया जा रहा है।
आलू-प्याज तो रोजाना खाने में उपयोग किया जाता है। जब ये ही महंगे होंगे, तो किचन का बजट ही बिगड़ जाएगा। प्रशासन को इनके दामों पर नियंत्रण करना चाहिए। - पूजा शर्मा, गणेश बाजार।
हर कोई सब्जी खरीदने के लिए मंडी नहीं जा सकता है। जिन दरों पर मंडी में सब्जियां बिक रही हैं। उसके आसपास दरों पर मंडी परिसर के बाहर भी मिलनी चाहिए। - किरन वैद्य, बड़ागांव गेट बाहर।
प्याज और आलू के दाम बेलगाम हो चुके हैं। इस पर जिम्मेदार नियंत्रण करने में नाकाम है। जब सरकार दावा कर रही है कि सस्ती प्याज दी जा रही है तो मिल क्यों नहीं रही? - दीपा सिंह, अयोध्यापुरी।
जिला प्रशासन को इतनी अधिक मात्रा में सब्जियों में मुनाफाखोरी करने वालों के खिलाफ अभियान चलाना चाहिए। ताकि, आम जन को महंगाई से राहत मिल सके। - निकिता जैन, सागर गेट।