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इच्छा शक्ति ने बदल दी स्कूल की रंगत

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इच्छा शक्ति ने बदल दी स्कूल की रंगत

झांसी।
एक शिक्षक की इच्छा शक्ति ने महज दो साल में सरकारी स्कूल की रंगत बदल दी। खुद के खर्च और समाज के सहयोग से उन्होंने खस्ताहाल स्कूल को आदर्श बना डाला। इससे विद्यालय में बच्चों की संख्या भी बढ़ गई है।
बड़ागांव विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय गौरारी का हाल दो साल पहले तक बदहाल था। स्कूल की चारदीवारी जगह-जगह टूटी पड़ी थी। अंदर परिसर में बड़े-बड़े गड्ढे थे, जिसमें पानी भरा रहता था। कक्षों की खिड़कियां टूटी हुईं थीं और शौचालय जीर्णशीर्ण था। इन हालातों में बच्चे भी स्कूल से कन्नी काटे रहते थे। साल 2017 में शिक्षक महावीर शरण ने विद्यालय में प्रधानाध्यापक पद का दायित्व संभाला। इसके बाद उन्होंने शुरू किया विद्यालय विकास का काम। सरकार की ओर से मिलने वाली धनराशि और खुद के खर्च से उन्होंने विद्यालय की मरम्मत कराई। खिड़की - दरवाजे दुरुस्त कराए और रंग रोगन का काम किया। परिसर के गड्ढों को भरने के लिए पास की गौरा पत्थर की खदान के संचालक का सहयोग लिया। मिट्टी भरवाकर जेसीबी से परिसर समतल कर दिया गया।
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सकारात्मक दिशा में किए गए इस कार्य को जनसहयोग भी मिलने लगा। पूरे परिसर में अब एपेक्स का फर्श है। बिजली का खंभा भी लग गया है। गणित व अन्य विषयों से संबधित फार्मूले व चित्र विद्यालय की बाहरी और अंदरूनी दीवारों पर नजर आते हैं। परिसर में क्यारियां भी बनी हुुई हैं। इससे बच्चों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। साथ ही उनका व्यवहार भी बदला है। बच्चे साफ सुथरी यूनिफार्म में समय से विद्यालय पहुंचते हैं। पढ़ाई में उनकी रुचि बढ़ी है। शिक्षक महावीर शरण ने बताया कि परिवेश का दिमाग पर बेहद असर पड़ता है। बच्चों को विद्यालय का अच्छा परिवेश मिलने से वे पढ़ाई में रुचि दिखाने लगे हैं। बदलाव को देखकर गांव के लोगों का भी सहयोग मिलने लगा है।
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शिक्षकों को विभाग का सहयोग
बेसिक शिक्षा अधिकारी हरिवंश कुमार ने बताया कि बड़ागांव ब्लॉक का प्राथमिक विद्यालय गौरारी बदलाव की मिसाल है। शिक्षक ने इच्छा शक्ति दिखाई तो सरकार की ओर से भी पूरा सहयोग मिला। अन्य शिक्षकों के लिए भी ये एक आदर्श स्थिति है। शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों को बेहतर बनाने का प्रयास करें, विभाग इसमें पूरा सहयोग करेगा। उन्होंने बताया कि कई शिक्षक और भी हैं, जिनके स्वयं के प्रयासों से विद्यालयों की स्थिति बेहतर हुई है।
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