बुंदेलखंड बनेगा औषधीय एवं सगंध पौधों का हब
- केंद्र सरकार ने स्वीकृत की 6.52 करोड़ की परियोजना
- बीयू को मिला परियोजना के क्रियान्वयन का जिम्मा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बुंदेलखंड औषधीय एवं सगंध पौधों के उत्पादन का हब बनेगा। केंद्र सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने इसके लिए 6.52 करोड़ रुपये की परियोजना को स्वीकृति दे दी है। परियोजना के अंतर्गत औषधीय एवं सगंध पौधों की कृषि एवं प्रसंस्करण की सुविधाएं बुंदेलखंड के अलग-अलग जिलों में विकसित की जाएंगी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को परियोजना के क्रियान्वयन का जिम्मा मिला है।
बुंदेलखंड की भौगोलिक विषमताओं एवं आजीविका से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए क्षेत्र को औषधीय एवं सगंध पौधों के उत्पादन का हब बनाने की योजना है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की तरफ से कुछ समय पहले इस संबंध में प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार को भेजा गया था। अब भारत सरकार ने प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी है। साथ ही, परियोजना के लिए 6.52 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बायोमेडिकल साइंस विभाग के उपाचार्य एवं परियोजना प्रबंधक डॉ. रामवीर सिंह ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत औषधीय एवं सगंध पौधों की कृषि एवं प्रसंस्करण की सुविधाएं बुंदेलखंड के अलग-अलग जिलों में विकसित की जाएंगी। क्षेत्र की सूखा की समस्या को मद्देनजर रखते हुए बिना सिंचाई के उगने वाली फसलों जैसे लेमन ग्रास, रोजा ग्रास आदि को प्रथम चरण में लगाया जा रहा है।
इसी चरण में पामा रोजा, तुलसी की फसलें भी लगाई जाएंगी। अगले चरण में वेटिवर, मोनार्डा पौधे लगाए जाएंगे। यह सभी सुगंधित पौधे हैं और इनसे निकलने वाले तेल का उपयोग औषधीय एवं इत्र से संबंधित वस्तुएं जैसे टेलकम पाउडर, साबुन, परफ्यूम आदि बनाने में होता है। परियोजना के क्रियान्वयन से किसानों की आय बढ़ेगी और आम जन को भी लाभ होगा। उन्होंने बताया कि एक एकड़ के लिए किसानों को अलग-अलग नि:शुल्क पौधे दिए जाएंगे। इनसे उत्पादन होने के बाद अन्य किसानों को पौधे दे दिए जाएंगे। अक्तूबर में किसानों को पौधे वितरित होंगे। इससे पहले बुंदेलखंड के विभिन्न जिलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें इच्छुक किसानों को चिह्नित किया जाएगा।
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अभी विदेशों पर निर्भरता
भारत अभी विशेषकर सगंध पौधों के लिए विदेशों पर ही निर्भर है। विश्व में प्रति वर्ष लेमन ग्रास ऑयल 5000 टन की खपत है। मुख्य रूप से इसका उत्पादन अमेरिका, इटली, स्पेन में होता है। जबकि, भारत में इसका पूरा तेल विदेशों से ही मंगाया जाता है। वहीं, वेटिवर ऑयल की विश्व में 700 टन प्रति वर्ष खपत है। इंडोनेशिया, चाइना, हयाती और भारत में उत्पादन होता है। हालांकि, भारत में काफी कम होता है। तुलसी की विश्व में हर साल 100 टन की खपत होती है। मिस्र, फ्रांस, मेडागास्कर में इसका अधिक उत्पादन होता है। कुछ उत्पादन भारत में भी होता है।