बुजुर्ग मतदाता बनेंगे ‘भाग्य विधाता’
झांसी। लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए बुजुर्गों का आशीर्वाद होना भी जरूरी है। क्योंकि, झांसी - ललितपुर संसदीय सीट के मतदाताओं में दस फीसदी से अधिक 60 साल से अधिक आयु के हैं। इनमें सर्वाधिक बुजुर्ग मतदाता मऊरानीपुर विधानसभा क्षेत्र में हैं।
युवा मतदाताओं पर तो हर राजनीतिक दल का फोकस है। उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने के लिए तमाम हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। उनसे रोजगार से लेकर ऋण तक के वादे किए जा रहे हैं। लेकिन, बुजुर्ग मतदाताओं के लिए राजनीतिक दलों के पास कोई खास योजना नजर नहीं आ रही है। यह स्थिति भारी पड़ सकती है। बुजुर्गों को नजरअंदाज करना नेताओं को भारी पड़ सकता है। क्योंकि, बुजुर्ग मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है।
झांसी - ललितपुर लोकसभा क्षेत्र के 20,15,173 वोटरों में 2,56,749 वोटर 60 साल से अधिक आयु के हैं। मऊरानीपुर विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक 58,349 बुजुर्ग मतदाता हैं। इसके अलावा झांसी में 53,570, ललितपुर में 54,240, बबीना में 38,753 और महरौनी विधानसभा क्षेत्र में 51,837 मतदाताओं की आयु 60 वर्ष से अधिक है।
156 की आयु सौ साल से अधिक
झांसी-ललितपुर लोकसभा क्षेत्र में 156 मतदाता ऐसे हैं, जिनकी आयु 100 साल से अधिक है। इनमें ललितपुर में सर्वाधिक 34 मतदाता हैं। इसके अलावा बबीना में 15, झांसी में 31, मऊरानीपुर में 21 और महरौनी विधानसभा क्षेत्र में सौ साल से अधिक आयु के 28 मतदाता हैं।
नये वोटरों से अधिक हैं बुजुर्ग
लोकसभा क्षेत्र में 18 से 19 वर्ष की आयु के नये वोटरों से अधिक संख्या बुजुर्ग मतदाताओं की है। लोकसभा क्षेत्र की पांचों विधानसभाओं में नये वोटर 26,313 हैं। इनमें बबीना विधानसभा क्षेत्र में 5,135, झांसी नगर में 5,104, मऊरानीपुर में 5,730, ललितपुर में 5,235 और महरौनी विधानसभा क्षेत्र में 5,109 नये मतदाता हैं।
बूथ पर बुजुर्ग न हों कतार में
बैंक ऑफ बड़ौदा से वरिष्ठ प्रबंधक पद से सेवानिवृत्त निरंजन धुलेकर का कहना है कि चुनाव में तस्वीरें सामने आती हैं कि असहाय बुजुर्ग को मतदान के लिए गोद में उठाकर लाया जा रहा है। ये स्थिति ठीक नहीं हैं। बुजुर्गों को मतदान के लिए प्रेरित करने के लिए जरूरी है कि उनके मतदान केंद्र पर विशेष सहूलियतें दी जाएं। असहाय बुजुर्गों को मतदान केंद्र तक वाहन से लाने की अनुमति दी जाए। इसके आगे के लिए व्हील चेयर की व्यवस्था हो। इसके अलावा व्यवस्था की जाए कि बुजुर्गों को मतदान के लिए कतार में न लगना पड़े, जैसे ही वे पहुंचे उनका वोट डलवा दिया जाए।
ये भी चाहते हैं बुजुर्ग
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- बुजुर्गों के लिए अलग से बुजुर्ग आयोग का गठन किया जाना चाहिए, जहां वे अपनी समस्याएं सीधे तौर पर रख सकें।
- असहाय बुजुर्गों को महज चार सौ रुपये पेंशन दी जाती है, ये उनके साथ मजाक है। न्यूनतम चार-पांच हजार रुपये पेंशन दी जानी चाहिए।
- डिफेंस की पेंशन ओआरओपी के तहत जिस तरह से रिवाइज की गई, अन्य महकमों के पेंशनरों की भी पेंशन रिवाइज की जानी चाहिए।
- वृद्धाश्रमों की संख्या बढ़ाई जाने चाहिए।
- सरकारी अस्पतालों में बुुुजुर्गों को इलाज में विशेष तरजीह दी जानी चाहिए।
- पेंशन पर इनकम टैक्स प्रावधान किया जाना चाहिए।
- रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फंड को बैंक में जमा करने पर सामान्य से ज्यादा ब्याज दिया जाना चाहिए।
- आए दिन देखा जाता है कि पारिवारिक झगड़ों में बुजुर्गों को भी आरोपी बनाकर मुकदमा कायम कर दिया जाता है। बुजुर्गों के प्रति कानून को नरम रुख दिखाना चाहिए।
सरकारी नीतियां बनाने में वरिष्ठ नागरिकों का भी सहयोग लेना चाहिए। उनके पास लंबा अनुभव होता है। बुजुर्ग अपनी बेहतरी के साथ-साथ समाज के अन्य तबकों की किस तरह से तरक्की हो सकती है, इसकी अच्छी समझ रखते हैं।
- बीबी दीक्षित, अध्यक्ष - वरिष्ठ नागरिक कल्यान सेवा समिति
रिटायरमेंट के बाद भी तमाम लोग कई और वर्षों तक पूरी ऊर्जा के साथ काम करने में सक्षम होते हैं। इसका सरकार उपयोग कर सके, इसकी व्यवस्था की जानी चाहिए। खासतौर पर जनहित के सरकारी अभियानों में बुजुर्गों की भूमिका सुनिश्चित करनी चाहिए।
- सुरेश चंद्र अग्रवाल, सेवानिवृत्त कर्मचारी - एफसीआई