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झांसीः 47 साल पुराने डकैती के मामले में सुनाई पांच-पांच साल की सजा

Sun, 17 Jan 2021 01:56 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र अधिनियम) व अपर जिला जज ममता गुप्ता की अदालत ने 47 साल से विचाराधीन डकैती के मामले में दोष सिद्ध होने पर दो अभियुक्तों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। इनमें से एक अभियुक्त अदालत में पेश नहीं हुआ। इस पर उसके वारंट जारी किए गए।

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विशेष अधिवक्ता विपिन कुमार मिश्रा के अनुसार नाथूराम ने 22 जुलाई 1973 को थाना उल्दन में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि रात में वह अपने परिवार के साथ सो रहा था। रात में बदमाश छत के रास्ते से घर में घुस आए। आहट से पत्नी के जागने पर बदमाशों ने फायर किए। शोर सुनकर सभी जाग गए। इसके बाद सभी बदमाश उनको पकड़कर नीचे कमरे में ले गए। यहां उन्होंने लूटपाट की। आवाज सुनकर गांव वाले भी आ गए थे। इस पर बदमाश गोलियां चलाते हुए भाग गए। पुलिस ने डकैती का मामला दर्ज कर जांच की।

पुुलिस ने इस मामले में थाना लहचूरा के इटायल गांव निवासी बुधुवा लोधी, थाना कटेरा निवासी हीरालाल गड़रिया, थाना गरौठा के कैरोखर निवासी भबूती, थाना टोड़ीफतेहपुर निवासी बटई काछी, गरौठा निवासी कल्लू व कटेरा के अनन्ता को गिरफ्तार किया। सभी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई। मुकदमा के दौरान अभियुक्त भबूती, बटई, कल्लू व अनन्ता की मौत हो गई। शनिवार को अदालत ने साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर बुधुवा व हीरालाल को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। अभियुक्त हीरालाल के अदालत में पेश न होने के चलते वारंट जारी किए गए।
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जिले के सबसे पुराने आपराधिक मामले में अदालत ने सुनाया फैसला
22 जुलाई 1973 को थाना उल्दन में हुई डकैती में लहचूरा पुलिस ने घटना में शामिल डकैतों पर 28 महीने में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। घटना के दौरान सभी बदमाश जवान थे, लेकिन सजा का समय आते-आते चार की मौत हो गई। शनिवार को 95 साल के उम्रदराज अभिुक्त बुधुवा को अदालत ने पांच साल की सजा सुनाई। एक अभियुक्त अदालत में उपस्थित नहीं हुआ।

घटना के समय सभी आरोपियाें की उम्र 20 से 22 साल थी। असलहों से लैस बदमाशों ने घर मेें जमकर तांडव मचाया था। लूटपाट कर सभी भाग निकले थे। गांव वालों से पूछताछ के बाद पुलिस ने नाम जुटाए थे। इसके बाद पुलिस ने छह आरोपियों के खिलाफ 20 नवंबर 1975 को चार्जशीट दाखिल की थी। समय गुजरता गया और मामला पुराना होता गया। मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा था, लेकिन वहां से आरोपियों को राहत नहीं मिल सकी। समय गुजरने के साथ मामला 47 साल पुराना हो गया। सुनवाई के दौरान आरोपी भबूती, बटई, कल्लू व अनन्ता की मौत हो गई। जिले के सबसे पुराने आपराधिक मामले में विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र अधिनियम) व अपर जिला जज ममता गुप्ता की अदालत ने सुनवाई शुरू की। इसके बाद शनिवार को बुधुवा व हीरालाल पर दोष सिद्ध कर पांच-पांच साल की सजा सुुनाई।

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