झांसी। जिले के 42,492 लोगों के पास बैंकों की साढ़े छह अरब रुपये की रकम फंसी हुई है। तमाम कोशिशों के बाद अदायगी न होने पर बैंकों ने इस धनराशि को नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) में डाल दिया है। बट्टे खाते की इस रकम में सबसे ज्यादा इजाफा कोरोना काल में हुआ है।
जिले में साल दर साल बैंकों का एनपीए लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि मार्च 2018 में बैंकों का एनपीए दो अरब रुपये था, जो अब बढ़कर छह अरब 55 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इसमें भी सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कोरोना काल में हुई है। कोरोना की त्रासदी से पहले मार्च 2020 में एनपीए तीन अरब 57 करोड़ रुपये था। महज दो साल में इसमें दो अरब 98 करोड़ रुपये की राशि और जुड़ गई है।
बता दें कि 90 दिनों तक ब्याज न मिलने पर बैंकों द्वारा ऋण खाते को एनपीए में डाल दिया जाता है। कर्ज की वसूली के लिए बैंकों की ओर से कर्जधारक से सीधा संपर्क किया जाता है। इसके बाद भी रकम वापस न आने पर आरसी काट दी जाती है।
साल दर साल इस तरह बढ़ा एनपीए
साल रकम
मार्च 2018 दो अरब 63 लाख
मार्च 2019 दो अरब छह करोड़
मार्च 2020 तीन अरब 57 करोड़
मार्च 2021 छह अरब 34 करोड़
मार्च 2022 छह अरब 55 करोड़
प्रमुख बैंकों का एनपीए
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- पीएनबी - एक अरब 76 करोड़
- एसबीआई - एक अरब 39 करोड़
- एचडीएफसी - एक अरब 71 करोड़
- आईसीआईसीआई - 88 करोड़ 79 लाख
- सेंट्रल बैंक - तीन करोड़ 53 लाख
- कैनरा बैंक - सात करोड़ 41 लाख
- यूनियन बैंक - छह करोड़ 85 लाख
- इंडियन बैंक - तीन करोड़ 54 लाख
- यूको बैंक - एक करोड़ 92 लाख
- बैंक ऑप बड़ौदा - दो करोड़
ऐसे डूबी बैंकों की रकम
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केस - 1
कारोबार हुआ बंद, कर्जधारक लापता
झांसी। फेब्रीकेशन के काम के लिए एक व्यक्ति ने बैंक से आठ लाख रुपये का ऋण लिया था। कोरोना काल में उसे दुकान बंद करनी पड़ गई, जो दुबारा फिर नहीं खुली। ऋण की किस्तें न आने पर बैंक के संपर्क करने पता पता चला कि उसने दुकान बंद कर दी है और मशीनें बेच दी हैं।
केस - 2
चला नहीं रेस्टोरेंट, बंद किया
झांसी। बैंक से 22 लाख रुपये का कर्ज लेकर एक व्यक्ति ने रेस्टोरेंट की शुरुआत की थी। लेकिन, कारोबार शुुरुआत से ही रफ्तार नहीं पकड़ पाया। शुरुआत में तो जैसे तैसे कर्जधारक बैंक की किस्तें अदा करता रहा, लेकिन पिछले एक साल से अदायगी बिलकुल बंद कर दी है।
कर्ज न चुकाने वाले लोगों से पहले बैंक सीधा संपर्क करते हैं। उसके बाद उनकी आरसी काट दी जाती है। कर्ज की वसूली के लिए बैंकों की ओर से लगातार कोशिशें की जा रही हैं।
- अरुण कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक