झांसी जिला केमिस्ट एसोसिएशन के सचिव नितिन मोदी का कहना है कि जिले में एक हजार थोक और फुटकर दवा विक्रेताओं के पास करीब 36,000 लीटर सैनिटाइजर रखे-रखे एक्सपायर हो गया है। जिले में जून 2021 में एक-एक दिन में 10-10 लाख रुपये का सैनिटाइजर बिक गया। लेकिन अब कोरोना संक्रमण कम होने के कारण डिमांड घट गई। है।
झांसी में एक हजार दवा विक्रेताओं के पास रखा-रखा 50 लाख का सैनिटाइजर एक्सपायर हो गया है। कोरोना की दूसरी लहर जब पीक पर पहुंची तो सैनिटाइजर सबको मिल नहीं पाता था। अब महामारी थमने के बाद इसे कोई खरीद नहीं रहा है।
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कोरोना महामारी से बचाव के लिए गाइडलाइन में मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग के साथ-साथ सैनिटाइजर का उपयोग करना अनिवार्य किया गया था। अप्रैल 2020 से शुरू हुई कोविड की पहली लहर ज्यादा घातक नहीं रही। बावजूद इसके लोगों ने सैनिटाइजर की खूब खरीददारी की। अप्रैल 2021 में कोरोना की दूसरी लहर में आई तो चारों तरफ तबाही मचा दी। इस लहर में मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा। कई लोगों को गंभीर रूप से बीमार कर दिया। ऐसे में सैनिटाइजर की मांग भी तेजी से बढ़ी।
हाल ये रहा कि जून 2021 में एक-एक दिन में 10-10 लाख का सैनिटाइजर बिक गया। ऐसे में थोक दवा विक्रेताओं ने भी इसका खूब स्टॉक कर दिया। जब तीसरी लहर आई तो दवा विक्रेताओं को इसकी बिक्री की उम्मीद थी, मगर टीकाकरण की वजह से ये लहर बेअसर साबित हो गई। दिन भर में 20 हजार रुपये से अधिक सैनिटाइजर नहीं बिक सका। अब मार्च में 200 थोक और 800 फुटकर दवा विक्रेताओं के पास रखा-रखा 36 हजार लीटर सैनिटाइजर एक्सपायर हो गया है। इसकी कीमत लगभग 50 लाख रुपये है।
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जिला केमिस्ट एसोसिएशन का है यह कहना
झांसी जिला केमिस्ट एसोसिएशन के सचिव नितिन मोदी का कहना है कि जिले में एक हजार थोक और फुटकर दवा विक्रेताओं के पास करीब 36,000 लीटर सैनिटाइजर रखे-रखे एक्सपायर हो गया है। इसकी कीमत 50 लाख रुपये है। इससे विक्रेताओं को नुकसान हुआ है।