झांसी। अगर पिछले पांच साल की बात की जाए तो झांसी से 337 लोग लापता हो गए हैं। यह कहां हैं और किस हाल में यह बताने वाला कोई नहीं है। पुलिस ने भी गुमशुदगी तो दर्ज कर ली मगर इन्हें तलाशने में कोई खासा प्रयास नहीं किया। वहीं परिवार वाले एक शहर से दूसरे शहर तक भटक रहे हैं। जहां से भी कोई सूचना मिल जाती तत्काल पहुंच जाते हैं। किसी को अपने बेटे का इंतजार है तो किसी को पति की वापसी का।
सीओ सिटी का वर्जन
सीओ सिटी राजेश राय का कहना है कि अपने तंत्र के माध्यम से लापता लोगों की पुलिस तलाश करती है। उनकी बरामदगी के लिए आसपास के जिलों में पुलिस भी भेजी जाती है। गुमशुदा की तलाश की फाइल कभी बंद नहीं होती है।
गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए यह है व्यवस्था
- लापता लोगों का विवरण एकत्रित करके इनको उप्र पुलिस के पोर्टल पर अपलोड किया जाता है
- लापता व्यक्तिों की निगरानी राज्य अपराध ब्यूरो की ओर से पोर्टल के माध्यम से
- एनसीआरबी दिल्ली की बेवसाइट से इसे लिंक किया गया है।
गंभीरता दिखाए पुलिस तब आसानी से मिल जाएं गुमशुदा
गुमशुदा लोगों की तलाश में मदद करने वाले समाजसेवी नीलेश जैन का कहना है अगर पुलिस गंभीरता से गुमशुदा लोगों की तलाश करे तब तमाम गुम लोगोें की तलाश हो सकती है। परिवार से गुम लोगों के बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड समेत अन्य डिटेल लेने चाहिए। पिछले एक माह के दौरान गुम लोगों के बैंकिंग लेन-देन की पड़ताल से उनकी रेल टिकट आदि बुक कराने के बारे में मालूम चल सकता है। अकसर पुलिस गुम लोगों के परिजनों एवं दोस्तों से तुरंत बात करने में दिलचस्पी नहीं दिखाती। इस वजह से उनकी तलाश नहीं हो पाती। पुलिस गुमशुदगी दर्ज करके उसे भूल जाती है।
बेटे की तलाश में दर-दर भटक रहा बाप, पुलिस ने नहीं की मदद
नवाबाद इलाके के सिविल लाइंस निवासी छक्की लाल वर्मा भी अपने गुमशुदा बेटे की तलाश में दर-बदर भटक रहे हैं। सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त छक्की लाल का कहना है कि उनका छोटा बेटा सुनील (44) 2 दिसंबर को अचानक लापता हो गया। उसकी स्कूटी नोटघाट पुल पर बरामद हुई लेकिन, सुनील का कहीं पता नहीं चला। इसके बाद वह नवाबाद थाने जाते रहे। पुलिस से पूछते रहे लेकिन, पुलिस ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। उनका कहना है पुलिस ने अभी तक सार्वजनिक स्थानों पर लापता संबंधी नोटिस भी नहीं चस्पा की। उन्होंने बेटे की गुहार के लिए एसएसपी से भी गुहार लगाई।
लापता बेटे की याद में आज तक नहीं सूखे मां के आंसू
कोतवाली के सैंयर गेट निवासी दीनदयाल का छोटा बेटा जितेंद्र (22) 15 अक्तूबर 2020 को अचानक ननिहाल से झांसी आते समय लापता हो गया। परिवार के लोगों ने उसकी हर जगह तलाश की। रिश्ते के लोग मुंबई में रहते हैं, वहां भी तलाशा लेकिन, उसका कुछ पता नहीं चला। मजबूरन पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराई लेकिन, उसका भी कोई नतीजा नहीं निकला। आज भी बेटे को याद करके मां कुसुम केे आंसू निकल पड़ते हैं। पिता दीनदयाल का कहना है कि ईश्वर पर ही भरोसा है। उसी के सहारे उनको जितेंद्र का इंतजार है।
पिता के इंतजार में घर में बिलख रही चार बच्चियां
सीपरी बाजार के दीनदयाल नगर निवासी विनोद कुमार (41) बाजार से समान लाने की बात कहकर निकले लेकिन, आज तक वापस नहीं लौटे। उनके भाई राकेश कश्यप बताते हैं कि विनोद दर्जी का काम करता है। उसकी शादी हो चुकी। उनकी चार बच्चियां हैं। पिता के इंतजार में बच्चियां परेशान हैं। विनोद की तलाश सभी जगहों पर की गई। रिश्तेदारी-नातेदारी में उनकी तलाश की गई। कहीं भी उनका पता नहीं चला। मजबूरन पुलिस के पास गए। पुलिस भी अभी तक उनका कोई सुराग नहीं लगा सकी है। विनोद ही परिवार के पालन-पोषण का एकमात्र जरिया हैं।