झांसी। झांसी रेलवे डिवीजन के बेड़े मेें जल्द ही 25 नए इंजन शामिल होंगे। खास बात यह है कि बिजली बचाने की नई तकनीकी से लैस इन इंजनों का निर्माण भी यहीं झांसी में हुआ है। भेल की स्थानीय इकाई में यह सभी इंजन तैयार किए गए हैं। इनका निर्माण पूरा हो गया है। जल्द ही नए इंजनों की यह खेप रेलवे को मिल जाएगी।
रेल अधिकारियों का कहना है कि यह सभी इंजन बिजली बचाने में काफी सहायक होंगे। इसके लिए इन इंजनों में री-जनरेटिंग ब्रेकिंग सिस्टम तकनीक
का इस्तेमाल किया गया है। इस तकनीक के जरिए ब्रेक लगाने पर पैदा हुई बिजली सीधे ओएचई वायर में जाएगी। इसके बाद अतिरिक्त बिजली ग्रिड में चली जाएगी। इस तकनीक के इस्तेमाल से अभी खर्च होने वाली बिजली में काफी हद तक कमी आ सकेगी। इस तकनीक पर आधारित रेल इंजन अन्य मंडलों में इस्तेमाल हो रहे हैं। अब झांसी मंडल को भी यह रेल इंजन मिल जाएंगे। इनमें अधिकांश रेल इंजन डब्ल्यूएपी-सात जनरेशन के हैं। इन इंजनों की क्षमता भी मौजूदा डब्ल्यूएपी-4 एवं डब्ल्यूएपी-5 से अधिक होगी। बता दें, अभी इस्तेमाल होने वाले पुरानी पीढ़ी के इंजनों में न सिर्फ बिजली की अधिक खपत होती है बल्कि भार वहन करने की क्षमता भी काफी कम होती है। आम तौर पर पुराने इंजनों से सिर्फ 3500 टन भार ही खींचा जा पाता है। अधिक भार होने पर इन इंजनों में गति भी नहीं आ पाती। अब नए इंजनों में न सिर्फ बिजली की बचत होगी बल्कि केबिन से गाड़ियों पर नियंत्रण भी पहले के मुकाबले सटीक तरीके से रखा जा सकेगा। जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह का कहना है कि भेल से यह इंजन जल्द ही मिलने की उम्मीद हैं।