आंखों के इलाज को स्टाफ नहीं
ललितपुर। जिले में संसाधनों और स्टाफ के अभाव में लोगों को उपचार की सुविधाएं मुहैया नहीं हो पा रही हैं। शासन से यहां पर प्रतिवर्ष 40 लाख रुपये मोतियाबिंद के दिए जाते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण बजट खर्च नहीं हो पाता है और लगभग 40 फीसदी पैसा वापस चला जाता है। इससे आंखों के इलाज की सुविधा का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा नेत्र रोग शिविर लगाकर जागरूक किया जाता है। जांच में मोतियाबिंद या संबंधित बीमारियां होने पर मरीज को निशुल्क ऑपरेशन की सलाह दी जाती है। इसमें कुछ मरीज मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए तैयार हो जाते हैं, तो उनको अस्पताल में भर्ती कर उपचार कर दिया जाता है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग को उपचार के लिए मिलने वाला बजट पूरा खर्च नहीं हो पाता है। बीते वित्तीय वर्ष में शासन ने स्वास्थ्य विभाग को मोतियाबिंद के ऑपरेशन व संबंधित बीमारियों के उपचार के लिए 40 लाख रुपये का बजट दिया था, लेकिन यहां पर संसाधनों के अभाव के कारण पूरा बजट खर्च नहीं हो सका। 12 लाख रुपये से आंखों के लेंस, ऑपरेशन से संबंधित दवाइयां, सामान, बच्चों को वितरित करने वाले नि:शुल्क चश्मे व ऑपरेशन के बाद मरीज को दिया जाने वाला काला चश्मा खरीदा गया है। इसके अलावा एक स्वयंसेवी संगठन द्वारा कराए गए 429 मोतियाबिंद के ऑपरेशन का खर्चा 08 लाख 58 हजार रुपये का भुगतान किया गया है। कुछ और पैसा खर्च हो पाया। लेकिन, पूरा बजट खर्च नहीं हो पाने के कारण 40 प्रतिशत बजट वापस चला गया। बजट खर्च न होने के पीछे संसाधनों की कमी बताई गई।
इस मद में खर्च की राशि वापस
आंखों के रोग से संबंधित विशेषज्ञ की तैनाती संविदा पर की जानी है। इसके अलावा एक नेत्र सहायक व कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति भी संविदा पर होनी है, जो लखनऊ से की जाएगी। लेकिन, नियुक्ति नहीं होने के कारण इनके वेतन भुगतान का लगभग 12 लाख रुपये वापस कर दिया गया। आपरेशन थियेटर के उपकरणों के रखरखाव के लिए एक लाख रुपये वापस कर दिए गई।
लगभग 40 प्रतिशत ऑपरेशन जिले से बाहर हो रहे हैं। यहां पर केवल एक ही संगठन आंखों के ऑपरेशन कर रहा है। इससे मोतियाबिंद के मद में आने वाला पैसा पूरा खर्च नहीं हो पा रहा है।
- डॉ. जेएस बक्शी, नोडल अधिकारी, नेत्र रोग विभाग
एक चिकित्सक ने प्राप्त किया लक्ष्य
जिले में स्वास्थ्य विभाग को 720 मोतियाबिंद के ऑपरेशन करने का लक्ष्य दिया गया था। इसको जिला अस्पताल में तैनात एक चिकित्सक ने पूरा करते हुए लक्ष्य के सापेक्ष 936 मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए।