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अटल जी ने साइकिल पर बैठकर किया था प्रचार-City

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‘अटल’ ने साइकिल पर बैठकर किया था प्रचार
- पूर्व प्रधानमंत्री का झांसी से था गहरा नाता, अनेकों बार आए अंतिम बार 1997 में
- 1953 में पहली बार सीपरी बाजार में रहने वाले मनोहर राव शहाणे के पास आए थे
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी का झांसी से गहरा नाता रहा। वह अनेक बार झांसी आए। 1953 में उन्होंने सीपरी बाजार में रहने वाले मनोहर राव शहाणे के साथ साइकिल पर बैठकर गांव-गांव जाकर चुनाव प्रचार किया था। 1997 में वह आखिरी बार झांसी भानी देवी इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। ‘अटल जी’ जरूर आज इस दुनिया में नहीं हैं। मगर, देश भर की तरह बुंदेलखंड में उनको समर्थकों और प्रशंसकों की कमी नहीं है। वह एक ऐसा नेता थे, जिनको हर वर्ग के लोग सुनना चाहते थे। वह जब भी झांसी आए, उनको देखने और सुनने के लिए हुजूम लगा रहा।
1952 में जनसंघ की स्थापना के साथ ही ‘अटल जी’ राजनीति में सक्रिय हो गए। 1953 में वह एक राजनेता के रूप में पहली बार झांसी आए। उस वक्त सीपरी बाजार में टाइपिंग इंस्टीट्यूट चलाने वाले जनसंघ नेता मनोहर राव शहाणे से उनका गहरा संपर्क रहा। शहाणे के साथ साइकिल पर बैठकर उन्होंने गांव-गांव जाकर चुनाव प्रचार किया। इसके बाद वह अनेक बार झांसी में चुनावी सभाओं को संबोधित करने आए। वह अक्सर सर्किट हाउस में ही रुकते या सीधे सभा स्थल से लौटकर वापस चले जाते थे। उन्होंने किला फोर्ट के सामने, खंडेराव गेट के पास किला मैदान में, मुक्ताकाशी मंच और मिनर्वा के सामने मैदान में कई सभाएं कीं। 1978 में वह जब जनता पार्टी की सरकार में विदेश मंत्री थे, तब उन्होंने सर्किट हाउस में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की थीं, जिसमें उन्होंने कार्यकर्ताओं के एक-एक कर उनके ऐसे नाम लिए कि जैसे वह सभी को बहुत नजदीक से जानते हो। उनका यह अपनापन देखकर कार्यकर्ता गदगद हो गए।
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अस्थायी जेल में आडवाणी से मिलने आए थे
1993 में बाबरी मस्जिद ढांचा ध्वस्त होेने पर ललितपुर के माताटीला विश्राम गृह में बनाई गई अस्थायी जेल में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती, अशोक सिंघल, विनय कटियार जैसे बड़े नेताओं को रखा गया था। वह इन नेताओं से मिलने माताटीला भी गए थे।
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साथ में दो बार काटी जेल
81 वर्षीय भाजपा के वरिष्ठ नेता गिरीश सक्सेना बताते हैं कि उनको अटल जी के साथ दो बार जेल जाने का मौका मिला। कच्छ आंदोलन के दौरान 1968 में 21 दिन तक अटल जी के साथ तिहाड़ जेल में रहे। इसके बाद 1974 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ चले आंदोलन में लखनऊ में अटल जी और रामनारायण के साथ मेरी गिरफ्तारी हुई। यहां भी मैंने अटल जी के साथ 21 दिन नैनी जेल में गुजारे। मेरा सौभाग्य था कि मुझे अटल जी की अधिकतर जनसभाओं में संचालन करने का मौका मिला। वह अपने भाषणों को तीन रूपों में पिरोते थे। वह अपने भाषण से कभी भावुक, तो कभी गर्मजोशी तो कभी ठहाके लगाने पर मजबूर कर देते थे।
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