असफलता से घबरा कार्य बीच में न छोड़ें
- बीटेक प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए हुए प्रेरण कार्यक्रम में बोले कुलपति
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। असफलता के बाद उत्पन्न सकारात्मक सोच किसी भी व्यक्ति को महान बना सकती है। अत: हमें असफलता से घबराकर अपने कार्य को बीच में ही नहीं छोड़ना चाहिए। यह बात बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने बीटेक प्रथम वर्ष के नव प्रवेशित छात्रों के लिए हुए प्रेरण कार्यक्रम में कही।
कुलपति ने छात्रों से कहा कि वह कुछ ऐसा करें कि संपूर्ण मानव इतिहास में उनका कृतित्व अमर हो जाए। दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय के प्रो. आरसी शर्मा ने कहा कि नव प्रवेशित छात्रों को अपनी पूरी मेहनत से अध्ययन करना चाहिए। भविष्य के लिए नवाचार जरूरी है। अपनी भाषा के साथ-साथ विद्यार्थी विदेशी भाषाओं पर भी अपना अधिकार बनाएं, ताकि विदेशों में होने वाले विभिन्न शोध कार्यों की जानकारी हो सके। टीक्यूप-3 प्रोजेक्ट के निदेशक एवं डीन इंजीनियरिंग प्रो. एसके कटियार ने 21 दिनों तक चलने वाले कार्यक्रम की जानकारी दी।
कुलसचिव डॉ. चतुर्भुजी गुप्त ने कहा कि सफलता के लिए लगातार प्रयास करना होगा, क्योंकि सफलता का कोई भी शॉर्टकट नहीं होता। डीएसडब्ल्यू प्रो. देवेश निगम ने छात्रों से विश्वविद्यालय कैंपस के अनुशासन का पालन करने को कहा। उप कुलसचिव रामचंद्र अवस्थी, टीक्यूप समन्वयक बृजेंद्र शुक्ला, टीक्यूप मीडिया समन्वयक इंजी. राहुल शुक्ला, डॉ. एपीएस गौड़, साक्षी दुबे, डॉ. पुनीत बिसारिया, डॉ. शुभांगी निगम, डॉ. जाकिर अली, बृजेश लोधी, डॉ. लक्ष्मी उपाध्याय, अनिल बोहरे मौजूद रहे।