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शहर में डेंगू और मलेरिया की एंट्री-City

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शहर में डेंगू का मरीज मिला, मलेरिया फैला
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- रक्त की जांच में हो रही है मर्ज की पुष्टि
- डॉक्टरों ने की सतर्कता बरतने की अपील
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
शहर में डेंगू और मलेरिया की दस्तक हो गई है। साथ ही कई मरीजों में मलेरिया की भी पुष्टि हुई है। इन सभी का इलाज चल रहा है। नजर रखी जा रही है। डॉक्टरों ने लोगों से सतर्कता बरतने की अपील की है।
बारिश के सीजन मच्छरों के पनपने के लिए खासा मुफीद माना जाता है। बरसात में जगह-जगह पानी का जमाव हो जाने के कारण मच्छरों की संख्या एकदम से बढ़ जाती है। इसी सीजन में डेंगू, मलेरिया का मच्छर भी पनपता है। हालांकि, डेंगू और मलेरिया के मच्छर अलग-अलग होते हैं। डेंगू का मच्छर रुके साफ पानी में पैदा होता है और यह दिन में ही काटता है। यह मच्छर कूलर, पानी की टंकी, पानी के बर्तन, फ्री की ट्रे में पनपता है। वहीं, मलेरिया प्जाज्मोडियम परजीवी के कारण होता है। मादा एनाफिलीज के काटने पर संक्रमित व्यक्ति के खून में इसके रोगाणु फैल जाते हैं। मलेरिया का मच्छर ज्यादातर ठहरे हुए पानी में पनपता है। मलेरिया के लक्षण मच्छर काटने के दसवें दिन से शुरू होकर चार सप्ताह तक बने रहते हैं। नर मच्छर लोंगों को नहीं काटता है और अपना भोजन पौधों से प्राप्त करता है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. डीएस गुप्ता ने बताया कि इस सीजन का पहला डेंगू का मरीज मिल गया है। ओपीडी में जांच के दौरान अमित कुमार नामक मरीज में डेंगू की पुष्टि हुई है। इसके अलावा 10-12 मरीज मलेरिया के आ चुके हैं। वहीं, मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. डी नाथ ने बताया कि मलेरिया के तो 15-20 मरीज मिल चुके हैं लेकिन जांच में किसी मरीज में डेंगू की पुष्टि नहीं हुई है।
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नि:शुल्क जांच की सुविधा
जिला अस्पताल में डेंगू, मलेरिया की नि:शुल्क जांच होती है। डेंगू के लिए एसआरएल लैब में एलाइज टेस्ट कराना होता है। दो-तीन दिन में रिपोर्ट मिलती है। वहीं, लैब के ऊपरी मंजिल पर बनी पैथालॉजी में मलेरिया की स्लाइड बनाकर जांच की जाती है। यदि चिकित्सक काउंट ब्लड सेल (सीबीसी) जांच लिखता है। तो यह पैथालॉजी में सौ रुपये में होती है। यदि मरीज गंभीर होता है, तो कुछ ही घंटों में रिपोर्ट दे दी जाती है। वरना एक-दो दिन बार रिपोर्ट आती है। रिपोर्ट में प्लेटलेट्स चालीस हजार से कम पाए जाने पर डॉक्टर एलाइजा टेस्ट अथवा स्लाइड जांच को लिखते हैं। इसके अलावा, मेडिकल कॉलेज में भी डेंगू, मलेरिया की माइक्रोबायोलॉजी विभाग में नि:शुल्क जांच होती है।

ये हैं डेंगू के लक्षण
- यह रोग एडीज इजिप्टी मच्छरों के काटने से होता है।
- डेंगू के लक्षण 3 से 14 दिन बाद दिखते हैं।
- डेंगू होने पर तेज बुखार के साथ शरीरी के उभरे चकत्तों से खून रिसता है।
- पेट खराब, कमजोरी, दस्त, चक्कर, भूख न लगने की समस्या हो जाती है।
- जब रोगी का तापक्रम सामान्य नहीं होता, तब रक्त में प्लेटलेट्स कम हो जाती।
- कई बार यह रोग जानलेवा हो सकता है।

खानपान पर ध्यान दें
- सादा भोजन का सेवन करें, जिसमें नमक स्वाद से अधिक न हो।
- अनार, ज्वार, गेहूं के घास का रस पिएं।
- ताजे मौसमी फलों का सेवन करें।
- नारियल पानी और साफ पानी ज्यादा मात्रा में पिएं।
- विटामिन सी युक्त फलों का खाना बेहतर रहता है।
- पपीते के पत्तों का रस बनाकर दिन में दो-तीन बार पिएं। इससे प्लेटलेट्स बढ़ती है।

ये हैं मलेरिया के लक्षण
- इस रोग में जोड़ों में दर्द, उल्टी, रक्ताल्पता की समस्या हो जाती है।
- अचानक तेज कंपकंपी के साथ ठंड लगना और फिर तुरंत बुखार आना।
- गंभीर मलेरिया से ग्रस्त मरीज की मृत्यु होने की भी संभावना रहती है।

मलेरिया में ये न करें
- भारी, गरिष्ठ, तली, मिर्च-मसालेदार चीजें न खाएं।
- मांसाहार और अंडा न खाएं।
- फ्रिज का ठंडा पानी, आइसक्रीम, ठंडी तासीर की चीजों का सेवन न करें।
- शराब बिल्कुल न पिएं।
- शरीर को ठंड न लगने दें। अधिक मेहनत वाला कार्य न करें।

ऐसे बचें
- मच्छरों से बचें। वहां सोएं जहां मच्छर न हों या कपड़ा ओढ़कर सोएं।
- बच्चों को मच्छरदानी या महीने कपड़े के नीचे सुलाएं।
- शरीर पर सरसों का तेल लगाएं, इससे मच्छर नहीं काटते।
- मच्छरों और लार्वा को खत्म कर दें।
- मच्छर रुके हुए पानी में पैदा होता है, इसलिए टूटे बरतनों से पानी हटाएं।
- घर के आसपास गड्ढों तथा पानी के एकत्र होने वाले स्थानों को पाट दें।
- छत की टंकी, टैंक, कूलर आदि का पानी सप्ताह में एक बाद जरूर बदलें।
- पानी की निकासी की सही व्यवस्था करें। संभव हो तो अंडरग्राउंड निकासी करें।
- मच्छर पैदा होने वाले स्थानों पर कीटनाशकों का छिड़काव करें।
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