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ओवरब्रिज की राह में पत्थर
सबहेड: 13 मीटर ऊंचे पिलर बनाने में आ रही दिक्कत
क्रासर
सीपरी बाजार ब्रिज बनने में अभी छह महीने और लगेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
सीपरी बाजार ओवरब्रिज के आखिरी दो पिलरों के गड्ढे खोदने में यहां की पथरीली जमीन रोड़ा बनी बनी हुई है। हालांकि, अब एक ही पिलर का गड्ढा खोदना बाकी रह गया है। लेकिन, यहां निकल रहे पत्थरों के कारण ब्रिज बनने में छह माह का समय और लग जाएगा।
सीपरी बाजार ओवरब्रिज निर्माण में सेतु निगम अपने हिस्से का काम पूरा कर चुका है, जबकि रेलवे का काम बाकी रह गया है। रेलवे ने नवंबर 2017 में काम पूरा होने का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन काम की गति को देखते हुए यह समय पर पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है। दरअसल, रेलवे को सबसे ज्यादा दिक्कत पुराने पुल के पास चार पिलर बनाने में आ रही हैं। इन पिलरों को जमीन के नीचे 55 फुट तक गड्डा खोदकर कंक्रीट से मजबूत करना है। इसके बाद जमीन से 13 मीटर ऊंचाई तक ले जाना है। अभी तक दो पिलर तो जमीन से पांच-पांच मीटर ऊपर तक बना लिए गए हैं, जबकि तीसरे पिलर के लिए 55 फुट गहरा गड्ढा कर लिया गया है। इन दिनों गड्ढे से मिट्टी निकालने का चल रहा है। साथ ही चौथे पिलर के लिए गड्ढा खुदना शुरू हो गया है। कंपनी अभियंताओं की माने तो अभी काम पूरा होने में छह माह का समय और लग जाएगा।
ये काम बाकी
- चारों पिलर 13-13 मीटर तक की ऊंचाई तक बनना है
- दोनों तरफ 9- 9 मीटर के गार्डर डालने का काम
- पटरियों के ऊपर 50-50 मीटर के गार्डर डालने का काम
- गार्डर डलने के बाद ब्रिज के बचे हिस्से में सड़क डालने का काम
ये भी समस्या
मार्च से मई तक बालू की कमी के कारण रेलवे के हिस्से का काम गति नहीं पकड़ पाया। जून में बालू मिलने पर पिलर बनाने का काम शुरू हुआ, लेकिन शासन ने एक जुलाई से 30 सितंबर तक बालू के खनन पर रोक लगा रखी है। इसका प्रभाव भी ब्रिज के काम पर पड़ रहा है। कंपनी के पास सिर्फ 15 दिन के काम लायक बालू बची है।
ये भी दिक्कतें
- नीचे पथरीली जमीन है, जिसको ब्लास्टिंग कर नहीं तोड़ा जा सकता है। इस कारण पिलर के लिए गड्ढा खोदने में समय लग रहा है।
- ब्रिज निर्माण के स्थान पर बाजार का हेवी ट्रैफिक निकलता है। जरा से गलती से कोई हादसा हो सकता है।
- पुल के नीचे दो रेल लाइन होने पर स्पाइन छोटे बनाने पड़ते हैं। मगर यहां पटरियों की संख्या अधिक होने के कारण स्पाइन लंबे बनाना पड़ रहे हैं।